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भाजपा ने लगाई सल्ट में जीत की हैट्रिक

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अल्मोड़ा। सल्ट विधानसभा सीट के उपचुनाव के नतीजे ज्यादा चौंकाने वाले नहीं रहे। भाजपा ने जो सहानुभूति का कार्ड चला था वह काम कर गया और यह सीट एक बार फिर से भाजपा की झोली में आ गई। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की हार का सिलसिला जारी है। वह पिथौरागढ़ में हुए उपचुनाव के बाद इस सीट को भी हार गई। इससे कांग्रेस की चुनावी तैयारियों पर एक बार फिर से सवालिया निशान लग रहे हैं।
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विधानसभा चुनाव से करीब 10 माह पहले यह उपचुनाव भाजपा के लिए राहत भरे रहे। एक तरह से देखा जाए तो भाजपा ने अपनी चुनावी तैयारियों की परीक्षा कर ली है और जनता ने उसे पास भी कर दिया है। बूथ स्तर पर ही युद्ध स्तर की रणनीति ने भाजपा को इस चुनाव में आगे कर दिया।
भाजपा नेताओं ने जब महेश जीना को टिकट दिया था तब से ही यह तय कर लिया था कि वह खुलकर उनके बड़े भाई सुरेंद्र जीना के नाम पर वोट मांगेगी, जबकि भाजपा का मूल चरित्र देखा जाए तो वह चुनाव प्रचार में इस तरह के हथकंडे नहीं अपनाती है। भाजपा प्रत्याशी महेश जीना से लेकर सीएम तीरथ सिंह रावत ने तक ने जनता से सुरेंद्र जीना के नाम पर वोट मांगे और सहानुभूति का कार्ड असर गया।
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इधर कांग्रेस प्रत्याशी ने जनता से जुड़े मुद्दों के नाम पर वोट मांगे। कांग्रेस प्रत्याशी गंगा पंचोली, प्रभारी देवेंद्र यादव से लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत ने भी महंगाई, किसान, पलायन जैसे मुद्दों का जिक्र किया। गंगा पंचोली ने इस चुनाव में स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा उछाला लेकिन भाजपा के सहानुुुभूति के कार्ड के आगे कांग्रेस की एक न चली।
भाजपा ने लगाई परिवारवाद पर मुहर
अल्मोड़ा। परिवारवाद को लेकर कांग्रेस को कोसने वाली भाजपा ने भी अब परिवारवाद को खुलकर अपना लिया है। पहले पिथौरागढ़ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा विधायक प्रकाश पंत के निधन पर उनकी पत्नी चंद्रा पंत को टिकट दिया और जीत भी हासिल की।
अब सल्ट में सुरेंद्र जीना के निधन के बाद उनके बड़े भाई को टिकट देकर जीत का परचम लहराया, जबकि फरवरी में जब महेश जीना को टिकट दिलाने की बात चल रही थी, तब भाजपा में एक खेमा और आरएसएस यह नहीं चाहता था कि सल्ट में महेश जीना को टिकट देकर भाजपा परिवारवाद को बढ़ावा दे लेकिन अब भाजपा भी जीत की गारंटी ही देख रही है। इसके लिए चाहें उसे अपने मूल सिद्धांतों से भी समझौता करना पड़े।
काम आई बूथ स्तरीय भाजपा की तैयारी
अल्मोड़ा। भाजपा ने बूथ स्तर पर पूरी तैयारी की थी। बूथ स्तर पर कैबिनेट मंत्रियों को चुनाव प्रचार में लगाया था। सांसद अजय टम्टा और अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल, राज्यमंत्री धन सिंह रावत और रेखा आर्या सहित अन्य बड़े नेता बूथ स्तर पर छोटी छोटी सभाएं करके जनता से वोट मांग रहे थे।
इससे भाजपा के पक्ष में अच्छा माहौल बन गया। यही नहीं भाजपा पूरी तरह से एकजुट भी रही। सल्ट से भाजपा की ओर से टिकट के अन्य दावेेदार डॉ. यशपाल सिंह रावत और दिनेश मेहरा टिकट न मिलने के बाद भी चुनाव प्रचार में जुटे रहे।
इधर कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव और विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल के अलावा अन्य कोई बड़ा नेता यहां चुनाव प्रचार में नहीं पहुंचा। हरीश रावत बीमार थे। उपचार के बाद वह चुनाव प्रचार के अंतिम समय में आ पाए। नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश और रंजीत रावत चुनाव प्रचार से दूर रहे। इसका असर भी जनता पर पड़ा।
अब 2022 में गंगा को टिकट मिलना मुश्किल
अल्मोड़ा। सल्ट से पूर्व कांग्रेस विधायक रंजीत रावत अपने बेटे और यहां के ब्लॉक प्रमुख विक्रम रावत के लिए टिकट मांग रहे थे लेकिन उनके बेटे को टिकट नहीं मिला। रंजीत रावत ने खुलकर नाराजगी जताई।
लोगों का यह भी कहना है कि रंजीत की नाराजगी भी गंगा को भारी पड़ी है, अन्यथा इतने बड़े अंतर से यह हार नहीं होती। अब अगली बार विधानसभा चुनाव में गंगा को टिकट मिलना मुश्किल है। वह यहां से लगातार दूसरी बार हार गईं हैं।
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