पद्मभूषण और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध इतिहासकार और लेखक रामचंद्र गुहा नेे कहा है कि महात्मा गांधी आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। जितने कि स्वतंत्रता आंदोलन के समय में थे। गुहा महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में उत्तराखंड सेवानिधि में पूर्व राज्यपाल पद्मश्री बीडी पांडे की स्मृति में दस कारण जो महात्मा गांधी को आज भी प्रासंगिक बनाते हैं विषय पर व्याख्यान दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता को विश्व शांति और सद्भावना के लिए भविष्य में भी सदैव याद किया जाता रहेगा। गांधी ने अहिंसा का संदेश दिया। सत्याग्रह के बल पर देश को आजादी दिलाई। उन्होंने कहा कि गांधी जी कहते थे कि भारत गांव में बस्ता है, लेकिन अब देश की 40 फीसदी आबादी शहरों में बस गई है। 40 करोड़ भारतवासी शहरों में रहते हैं। गांधी ने ग्राम स्वराज की परिकल्पना की थी। 73वें और 74 वें संविधान संशोधन के पूर्ण रूप से क्रियान्वयन से ही पंचायती राज की परिकल्पना साकार हो सकती है। वर्तमान में जंगली जानवरों को अधिक महत्व दिया जा रहा है, जबकि गांधी चिंतन में व्यक्ति का अधिक महत्व है।
गुहा ने कहा कि खनन पर्यावरण के लिए नुकसान दायक है। वर्तमान में समाज कमजोर हो रहा है और सरकारें मजबूत होते जा रही हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी जाति, धर्म, लिंग के आधार पर विभाजन के खिलाफ थे। गांधी सत्याग्रह, सफाई, अहिंसा,पर्यावरण संरक्षण, लोकतंत्र के हिमायती रहे। उनके यह विचार आज भी प्रासंगिक हैं। बाद में गुहा ने श्रोताओं के सवालों के जवाब भी दिए। इस मौके पर पद्मश्री डॉ. ललित पांडे, रंजन पांडे, डॉ. शेखर पाठक, राधा बहन, अनुराधा पांडे, रवि पांडे, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, एसएसपी पीएन मीणा ने भी चर्चा में भाग लिया।
कार्यक्रम में पालिकाध्यक्ष प्रकाश जोशी, राजीव लोचन साह, डॉ. दीवान नगरकोटी, पीसी तिवारी, डॉ. जेसी भट्ट, डॉ. रमेश पांडे राजन, मनोहर ब्रजवाल, डॉ. हरीश जोशी, कमल जोशी, डॉ. दिवा भट्ट, थ्रीश कपूर, सुमन दुबे, शेखर लखचौरा, चंद्र मोहन जोशी आदि मौजूद थे।