सात फेरों के वक्त जिंदगी भर साथ जीने और मरने की कसमें खाई और आखिरकार इस वायदे को पूरा भी किया। धौलादेवी ब्लाक के अंतर्गत पुनौली गांव निवासी आर्मी से सेवानिवृत हवलदार शेर सिंह सिजवाली (86) और उनकी पत्नी कमला देवी (82) का एक साथ निधन हो गया। दोनों की चिताओं को स्थानीय श्मशान घाट में एक साथ अग्नि दी गई।सिजवाली दंपति का एक साथ निधन होने से गांव में शोक की लहर है।
जानकारी के मुताबिक चीन और पाकिस्तान के साथ हुई लड़ाई में हिस्सा ले चुके सेवानिवृत्त हवलदार शेर सिंह सिजवाली आगरा में रहने वाले अपने पुत्र सुंदर सिंह सिजवाली के वहां गए थे। हृदय गति रुक जाने से शनिवार को शेर सिंह सिजवाली का आगरा में घर पर ही निधन हो गया। सुंदर सिंह सिजवाली पिता के शव को लेकर अपनी माता कमला देवी और परिजनों के साथ अपने पैतृक गांव पुनौली के लिए रवाना हुए। आगरा से अभी कुछ आगे पहुंचे थे कि कमला देवी की भी हृदय गति रुक जाने से मौत हो गई।
गत दिवस पंचदेवलेश्वर श्मशानघाट में पति-पत्नी की चिताओं को एक साथ अग्नि दी गई। पुत्र सुंदर सिजवाली और पौत्र भारत सिंह सिजवाली ने मुखाग्नि दी।
लोगों ने बताया कि पति-पत्नी दोनों धार्मिक प्रवृत्ति थे और गरीबों की मदद करते थे। शेर सिंह सिजवाली काफी कर्मठ व्यक्ति थे। उन्होंने 1962 में चीन के बाद 1965 और 1971 में पाकिस्तान से युद्ध लड़ा। 1971 के युद्ध के दौरान उन्होंने चार पाकिस्तानियों को मार गिराया। दुश्मन की गोली से वह घायल हो गए। घायल होने पर भी उन्होंने दुश्मनों से लोहा लिया। उनके निधन पर प्रधानाचार्य पारस नाथ सिंह, सेवानिवृत्त प्रभारी फार्मेसी अधिकारी एमएस बगडवाल, सेवानिवृत आईटीबीपी अधिकारी शेर सिंह बगड़वाल, कमलेश सिंह आदि ने दुख जताया है।