बोर्ड की परीक्षाओं में हर साल तमाम टॉपरों के नाम चर्चा में आते हैं, लेकिन आगे जाकर इनमें से अधिकांश भीड़ में गुम हो जाते हैं। दूसरी तरफ कई बार सामान्य अंक प्राप्त करने वाले छात्र शानदार करियर बना लेते हैं। जानकार मानते हैं कि अंकों के प्रतिशत से सफलता का मापदंड तय नहीं हो सकता। अल्मोड़ा के गुरुरानीखोला निवासी सौम्या गुरुरानी दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में प्रदेश और जिला स्तर में टॉपर तो दूर क्लास में दूसरे स्थान पर रही थीं, लेकिन हाल ही में आईएएस की परीक्षा में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर 30वीं रैंक हासिल करके अल्मोड़ा का नाम रोशन किया। इससे पहले वह उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा में भी टॉप कर चुकी हैं।
सौम्या गुरुरानी ने 2007 में कूर्मांचल एकेडमी अल्मोड़ा से आईसीएसई की दसवीं की परीक्षा में 93 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे और वह क्लास में दूसरे स्थान पर रही थीं। जबकि उस साल हार्दिक कांडपाल 94 प्रतिशत अंकों के साथ क्लास में सर्वोच्च स्थान पर रहे थे। 2009 में बारहवीं की परीक्षा में भी सौम्या 90 प्रतिशत अंक लाकर कक्षा में दूसरे स्थान पर रहीं। फिर बीटेक करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने की ठान ली और अल्मोड़ा में रहकर ही तैयारी में जुट गईं।
वह दो साल पहले उत्तराखंड की पीसीएस परीक्षा में सर्वोच्च स्थान पर (टॉपर) रहीं। उसी साल उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर ली, लेकिन रैंक पीछे होने के कारण उन्हें आईपीएस मिला। आईपीएस में ज्वाइन करने के बाद बीते साल दोबारा सिविल सेवा की परीक्षा दी और राष्ट्रीय स्तर पर 30वीं रैंक हासिल कर ली। सौम्या खुद कहती हैं कि बारहवीं की परीक्षा अथवा स्नातक स्तर पर आप टॉपर हों अथवा एवरेज इससे प्रतियोगी परीक्षाओं में आपकी सफलता पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता, लेकिन आपने जो भी विषय पढ़ा हो उसकी आपको गहराई से जानकारी होनी जरूरी है।