लमगड़ा (अल्मोड़ा)। स्वास्थ्य सुविधाओं में बेहतर सुधार करने के नाम पर सरकार और स्वास्थ्य विभाग जनता को गुमराह कर रहे हैं। लमगड़ा ब्लॉक मुख्यालय में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र(पीएचसी) के बाहर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का बोर्ड तो लगा दिया है, लेकिन यहां सीएचसी की कोई सुविधा नहीं है।
हालत यह है कि अस्पताल में डाक्टरों के कई पद खाली हैं। सुविधा के नाम पर एक्सरे मशीन तो है, लेकिन एक्सरे तकनीशियन के अभाव में मशीन कई सालों से बंद पड़ी है। लमगड़ा ब्लॉक मुख्यालय में 1983 में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की गई थी। अस्पताल में 2003 से महिला चिकित्सक, फिजिशियन, नेत्र सहायक के पद खाली चल रहे हैं।
अस्पताल में 2003 में एक्सरे मशीन स्थापित की गई, लेकिन एक्सरे तकनीशियन के अभाव में मशीन बंद पड़ी है। इस अस्पताल में गौलीमहर, ठाठ, कपकोट, तिवारीजाख, धुरासंग्रौली, चायखान, तुलेड़ी, कल्टानी, तोली, ढैली, फरसों, नौरा, बघाड़, मलाड़ी, बलचूना, सांगड़, लमकोट, कनरा, बलिया, बैगनिया, विशौद, धारखोला, मेरगांव, नैनी, सत्यूं, कोकिला गांव, देवनाला, मोतियापाथर, बचकांडे, खरसों, भांगाद्योली, नाटाडोल, डोल, खरसोड़ा, सिरसोड़ा, ध्यूलीजाख, रौतेलाजाख, रणाऊं, मिरौली, धारीरौ, छड़ौजा समेत दूरस्थ गांवों के रोगी उपचार कराने आते हैं, लेकिन डाक्टरों की कमी के कारण उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
डाक्टर नहीं होने के कारण ग्रामीणों को सामान्य बीमारी होने पर भी उपचार कराने के लिए जिला मुख्यालय अथवा अन्य शहरों में जाना पड़ता है। इससे जनता का समय और धन बर्बाद होता है। कई बार इस अस्पताल में गंभीर रोगी पहुंचते हैं, लेकिन अस्पातल प्रशासन रोगी को रेफर कर देता है। हायर सेंटर पहुंचने तक रोगी रास्ते में ही दम तोड़ देता है। लमगड़ा निवासी अमर सिंह रावत ने बताया कि अस्पताल में डाक्टरों की कमी के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।