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बेस अस्पताल के हाल, बाहर की दवा लिख रहे डाक्टर, कैसे मिलेगा सस्ता इलाज

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बेस अस्पताल की टूटी पड़ी छत। - फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। बेस अस्पताल अल्मोड़ा पर पूरे जिले के हजारों मरीज निर्भर हैं। जिला अस्पताल में सुविधाएं कम होने से यहां से भी मरीज बेस में रेफर किए जाते हैं लेकिन बेस अस्पताल का हाल यह है कि यहां डॉक्टर मरीजों के पर्चे में बाहर की दवा लिख रहे हैं। जो दवा अस्पताल की लिखी जा रही है वह अस्पताल में उपलब्ध ही नहीं है। जन औषधि केंद्र का भी मरीजों को पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। डॉक्टरों की कमी से मरीजों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ता है। अस्पताल परिसर में कई जगह गंदगी का अंबार भी लगा है।
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बेस अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए संवाद न्यूज एजेंसी की टीम बेस अस्पताल पहुंची। यहां कई मरीज इलाज के लिए सुबह से इंतजार कर रहे थे। मरीजों ने बताया कि डॉक्टर कम होने से उन्हें इलाज मिलने में देरी हो रही है। कुछ डॉक्टर बार-बार अपने कक्ष से उठकर चले जा रहे हैं इससे भी व्यवधान हो रहा है। डॉक्टर को दिखा कर बाहर आ रहे मरीजों ने बताया कि डॉक्टर ने पर्चे में अधिकांश दवाएं बाहर की लिखी हैं। जो दवाएं अस्पताल की लिखी हैं वह अस्पताल में हैं ही नहीं जिससे उन्हें भी बाहर से खरीदना पड़ रहा है। अस्पताल में कहीं छत टूटी है तो कहीं सीवर का खुला चेंबर हादसों को दावत दे रहा है। नालियों में गंदा पानी जमा है। महिलाओं के लिए शौचालय है लेकिन उसमें कुंडा ही नहीं है जिससे महिलाएं इस शौचालय का इस्तेमाल करने से परहेज करती हैं। मरीजों के चढ़ने के लिए सीढ़ियां नहीं है, जिससे मरीज नाले के ऊपर से गुजरते हैं। अल्ट्रासाउंड कक्ष के पास खाली बोतलों का ढेर है।
क्या कहते हैं मरीज
डॉक्टर को दिखाने के लिए आधे से एक घंटा इंतजार करना पड़ता है। कई बार डॉक्टर चले जाते हैं। अगर डॉक्टर पूरा समय मरीज को देखने में लगाएं तो दूरदराज से आने वाले मरीज समय पर अपने घर पहुंच सकेंगे। उन्हें वाहन बुक कर अतिरिक्त पैसा खर्च नहीं करना पड़ेेगा।
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- मुकेश आर्या।
पत्नी गर्भवती थी तो जिला अस्पताल ले गया वहां से बेस रेफर कर दिया। यहां से भी डॉक्टरों ने हल्द्वानी जाने को कहा। फिर भर्ती किया और चार अप्रैल को बच्चे का जन्म हुआ। आज सुबह डॉक्टर बोले पत्नी को पीलिया है। मैने पूछा यहां इलाज मिलेगा या नहीं तो कुछ नहीं बताया।
- नरेंद्र बहादुर।
मैं अपनी बहन का इलाज कराने बेस अस्पताल आया हूं। जिस डॉक्टर को दिखाना था वह ऑपरेशन में व्यस्त हैं और दूसरा कोई डॉक्टर नहीं जो इलाज कर सके। सुबह से डॉक्टर का इंतजार करना पड़ा। जब मरीजों की संख्या बढ़ने लगी तो स्टाफ ने दूसरे डॉक्टर के पास भेजा है।
- आलम कुुुरैशी।
कुछ दवाएं अस्पताल में उपलब्ध हैं जो नहीं हैं उन्हें बाहर से मंगाते हैं। अस्पताल में 40 प्रतिशत डॉक्टरों की कमी है और मरीजों की संख्या अधिक है जिससे मरीजों को थोड़ी परेशानी होती है। व्यवस्थाओं में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है।
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- डॉ. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा।
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