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ये कैसी पर्यटन नगरी, जहां कूड़ा ही कूड़ा

Mon, 09 Oct 2017 11:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
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पर्यटन नगरी को स्वच्छ रखने के लिए न जाने कितने प्रयास हो चुके हैं, इसके लिए स्वच्छता ही सेवा नाम से स्वच्छता पखवाड़े का भी आयोजन हुआ, लेकिन फर्क कुछ नहीं पड़ा। गली मोहल्लों में यहां-वहां कूड़ा बिखरा पड़ा है, कूड़ेदान की गंदगी बाहर निकल रही है, बदबू से लोगों का जीना मुहाल हो रहा है।
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मालूम हो कि छावनी परिषद ने सफाई व्यवस्था ठेके पर दी हुई है,  लाखों रुपये सालाना ठेकदार को दिया जा रहा है, लेकिन सफाई व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। अंग्रेजों की बसाई पर्यटन नगरी के अब हाल बेहाल हो चुके हैं, हालांकि छावनी परिषद ने कई बार सफाई व्यवस्था को ढर्रे पर लाने के लिए कई अभियान चलाए, लेकिन जागरूकता और नियमित सफाई नहीं होने के कारण इन अभियानों का दम फूल चुका है।

इधर एक साल पहले कर्मचारियों की कमी के कारण व्यवस्था ठेके पर दी गई, दिल्ली की एक कंपनी को लाखों रुपये सालाना दिया जा रहा है, लेकिन व्यवस्था में सुधार नहीं आ पा रहा है। मूत्रालय गंदगी से पटे पड़े हैं, गली मोहल्लों में नियमित कूड़ा नहीं उठ रहा।
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खड़ी बाजार, जरूरी बाजार के लोगों का कहना है कि कूड़ा नहीं उठने से नाक में रुमाल रखकर आना-जाना पड़ रहा है। सफाई नहीं होने से लोगों में भी आक्रोश है। कहना है कि साल भर पर्यटक पहुंचते हैं, लेकिन गंदगी के कारण वह लोग कड़वे अनुभव लेकर लौट रहे हैं। इधर, कैंट के अधिकारियों का कहना है कि दीपावली के कारण कूड़ा घरों से अधिक निकल रहा है, ठेकेदार को नियमित सफाई के आदेश जारी कर दिए गए हैं। 

ठेका निरस्त करने की फिर उठेगी मांग 
सफाई व्यवस्था का ठेका निरस्त करने की मांग उठने लगी है। छावनी उपाध्यक्ष मोहन नेगी ने कहा कि व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो रहा है। आए दिन लोग शिकायत लेकर पहुंचते हैं। पूर्व में हुई सिविल एरिया कमेटी की बैठक में उन्होंने सभासदों के साथ ठेका निरस्त करने की मांग उठाई थी, इस मामले को फिर से बोर्ड में उठाया जाएगा। 
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