अल्मोड़ा। नगर स्थित महिला अस्पताल में निश्चेतक न होने से ऑपरेशन करने मुश्किल हो रहे हैं। नर्सिंग अधिकारी के आठ पद खाली हैं। कर्मियों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रहीं हैं जिसकी मार गर्भवतियों, प्रसव पीड़िताओं और अन्य मरीजों को सहनी पड़ रही है।
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावे दम तोड़ रहे हैं। स्वास्थ्य कर्मियों की कमी से जूझ रहा जिले का सबसे बड़ा महिला अस्पताल इसकी तस्दीक कर रहा है। यहां सिजेरियन सहित अन्य ऑपरेशन करने के लिए बेहद जरूरी निश्चेतक का पद तीन, महिला रोग विशेषज्ञ का पद दो साल से खाली है। यहां स्वीकृत 11 पदों के सापेक्ष यहां महज तीन नर्सिंग अधिकारी और सात के सापेक्ष दो वार्ड आया तैनात हैं। ऐसे में स्वास्थ्य कर्मियों की कमी के कारण स्वास्थ्य व्यवस्थाएं नहीं सुधर सकीं हैं जिससे गर्भवतियों, प्रसव पीड़िताएं और अन्य सभी मरीज परेशान हैं। हालात यह हैं कि निश्चेतक न होने से कई बार सिजेरियन ऑपरेशन करने मुश्किल हो रहे हैं और प्रसव पीड़िताओं को हायर सेंटर रेफर करना मजबूरी बन गया है।
मुख्य चिकित्साधीक्षक की नहीं हो सकी तैनाती
अल्मोड़ा। महिला अस्पताल में मुख्य चिकित्साधीक्षक (सीएमएस) की स्थायी नियुक्ति नहीं हो सकी है। यहां तैनात एकमात्र बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीति पंत को पीएमएस की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में नवजातों के उपचार में दिक्कत हो रही है लेकिन इसे देखने वाला कोई नहीं है। यहां कनिष्ठ सहायक भी तैनात नहीं हैं।
महिला अस्पताल में खाली पदों की जानकारी निदेशालय को भेजी गई है। इन पदों पर नियुक्ति शासन स्तर से ही संभव है। विभाग महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का प्रयास कर रहा है। - डॉ. आरसी पंत, सीएमओ अल्मोड़ा।