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Almora News: सरकार आंखें मूंदी रही और 1087 स्कूल बदहाल हो गए

Sat, 25 Feb 2023 11:35 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
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अल्मोड़ा। अल्मोड़ा में सरकारी स्कूलों की हालत बेहद खराब है। जिले में 1088 स्कूल ऐसे हैं जो जर्जर या क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इन स्कूलों के नवनिर्माण या सुधारीकरण के लिए 18 करोड़ रुपये की जरूरत आंकी गई है लेकिन यह बजट कहां से और कब मिलेगा इसकी जानकारी किसी को नहीं है। ऐसे में जर्जर हो चुके इन स्कूलों में आठ हजार से अधिक बच्चे जान जोखिम में डालकर सुनहरे भविष्य के सपने बुनने के लिए मजबूर हैं।
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जिले में पांच माह पूर्व जर्जर और क्षतिग्रस्त स्कूलों का आकलन सर्वे किया गया था। जिले में कुल 263 माध्यमिक और 1329 प्राथमिक स्कूल हैं। विभाग ने जो रिपोर्ट तैयार की है वह हैरान करने वाली है।इनमें से 133 माध्यमिक और 954 प्राथमिक स्कूल जर्जर हो चुके हैं जो यहां पढ़ने वाले आठ हजार बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। इन स्कूलों के सुधारीकरण और नवनिर्माण के लिए करीब 18 करोड़ रुपये की जरूरत है।

हैरान करने वाली बात यह है इसका प्रस्ताव बीते कई सालों से शासन में भेजा जा रहा है जो सरकारी फाइलों में धूल फांक रहा है। इस बार भी विभाग शासन में प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रहा है। देखना यह है कि क्या इस बार शासन से बजट की मंजूरी मिलती है या किसी हादसे के बाद ही जिम्मेदारों की आंखें खुलेंगी।
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205 स्कूल पूर्ण रूप से हैं क्षतिग्रस्त

अल्मोड़ा। जिले में 135 माध्यमिक और 70 प्राथमिक स्कूल पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त मिले हैं। इनके नवनिर्माण के लिए 10 लाख रुपये से अधिक प्रति स्कूल के हिसाब से बजट की जरूरत है। वहीं 450 स्कूलों के सुधारीकरण के लिए विभाग को प्रति स्कूल दो से 10 लाख जबकि 433 स्कूलों के लिए प्रति स्कूल दो लाख रुपये की जरूरत है।
लोगों का कहना
राज्य बनने के 22 साल बाद भी स्कूल भवनों की हालत काफी जर्जर हालत में है। ऐसे में स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है। अभिभावकों को बच्चों के स्कूूल से घर लौटने तक चिंता लगी रहती है। नाई का स्कूल कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुका है। डीएम को ज्ञापन देकर स्कूल भवन के शीघ्र सुधारीकरण की मांग की गई है। - सुरेंद्र नयाल, एसएमसी अध्यक्ष, जीआईसी नाई।

जिले के लंबे समय से हादसों को दावत देते जर्जर स्कूल भवनों की सुध नहीं ली जा रही है। इसके अलावा स्कूल में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। भवनों की मरम्मत और रिक्त पदों पर भर्ती करनी चाहिए। - ममता भंडारी, पीटीए अध्यक्ष, जीआईसी नाई।

शिक्षकों की कमी और स्कूल भवनों के बदहाल होने से इसका असर स्कूल की छात्र संख्या पर पड़ रहा है। स्कूल में सुविधाओं का अभाव होने से अभिभावक बच्चों को दूसरे स्कूल में पढ़ाने को मजबूर हैं। प्रशासन और सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। - निर्मल नयाल, महासचिव, क्षेत्रीय संसाधन पंचायत संगठन, ताकुला।

कई बार स्कूल का आकलन किया जा चुका हैै। डीएम को स्कूल की समस्याओं के बारे में अवगत कराया गया है। कुछ सप्ताह पूर्व भी स्कूल का फिर से कार्यदायी संस्था ने आकलन किया था। स्कूल भवन का सुधारीकरण नहीं होने से खतरा बना हुआ है। स्कूल में बच्चों के लिए पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं है। - दीप्ति भोजक नयाल, अध्यक्ष, लोक प्रबंधन विकास संस्था।
क्षतिग्रस्त और जर्जर स्कूलों के सुधारीकरण एवं नवनिर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने की तैयारी की जा रही है। शासन से बजट मिलते ही जर्जर स्कूलों की मरम्मत और नवनिर्माण का कार्य शुरू कराया जाएगा। - हेमलता भट्ट, मुख्य शिक्षा अधिकारी, अल्मोड़ा।
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