तेंदुए को देखने के लिए मौके पर भीड़ एकत्र हो गई। ग्रामीणों की सूचना के बाद मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम तेंदुए को पिंजरे सहित अल्मोड़ा के मृग विहार स्थित रेस्क्यू सेंटर ले गई। रेंजर मोहन राम आर्या ने बताया कि तेंदुए की उम्र करीब आठ वर्ष है।
आखिरकार रैंगल गांव में दहशत का पर्याय बना तेंदुआ पिंजरे में कैद हो गया है। यहां लंबे समय से तेंदुए की दहशत बनी हुई थी। ग्रामीणों की मांग पर वन विभाग ने पांच दिन पूर्व ही यहां पिंजरा लगाया था जिसमें उसे कामयाबी मिली है। बुधवार को प्राथमिक पाठशाला रैंगल में छुट्टी के बाद अल्मोड़ा लौट रहीं शिक्षिका को पिंजरे में कैद तेंदुआ दिखाई दिया।
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उन्होंने इसकी जानकारी ग्रामीणों को दी। सूचना मिलते ही तेंदुए को देखने के लिए मौके पर भीड़ एकत्र हो गई। ग्रामीणों की सूचना के बाद मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम तेंदुए को पिंजरे सहित अल्मोड़ा के मृग विहार स्थित रेस्क्यू सेंटर ले गई। रेंजर मोहन राम आर्या ने बताया कि तेंदुए की उम्र करीब आठ वर्ष है। ग्रामीणों की मांग पर उनकी सुरक्षा को देखते हुए पिंजरा लगाने की अनुमति ली गई थी जिसमें सफलता मिली है।
तेंदुए के टूटे हैं कैनाइन दांत
रेंजर मोहन राम आर्या ने बताया कि तेंदुए के कैनाइन दांत टूटे हैं। ऐसे में वह अधिक हिंसक हो सकता था। आसानी से शिकार की खोज में वह लोगों पर भी हमला कर सकता था। अब उसके पकड़े जाने से खतरा खत्म हो गया है।