अल्मोड़ा। हवालबाग ब्लॉक के जूड़ कफून में लंबे समय से आतंक का पर्याय बना तेंदुआ शनिवार तड़के वन विभाग द्वारा वहां लगाए गए पिंजरे में फंस ही गया। तेंदुए के पिंजरे में फंसने के बाद क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली। वन कर्मी तेंदुए को लेकर रेसक्यू सेंटर गए जहां चिकित्सकों ने उसकी जांच की। तेंदुआ करीब 14 से 15 साल का है और स्वस्थ है।
दो-तीन दिन उपचार के बाद तेंदुए को उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा।
मालूम हो लंबे समय से कफून, डोबा समेत आसपास के गांवों में मौजूद तेंदुआ गांव में लगभग चार दर्जन मवेशियों को निवाला बना चुका है।
तेंदुए के भय से ग्रामीण शाम के समय घर के अंदर दुबकने को मजबूर थे और वन विभाग से पिंजरा लगाने की मांग करते रहे। बाद में वन विभाग ने जूड़-कफून में पिंजरा लगाया। शनिवार तड़के जब ग्रामीणों ने पिंजरे में तेंदुआ फंसा हुआ देखा तो राहत की सांस ली और इसकी सूचना वन विभाग को दी।
बाद में वन क्षेत्राधिकारी संचिता वर्मा, केवलानंद पांडे, भुवन टम्टा, किशोर चंद्र मौके पर पहुंचे और पिंजरे में कैंद तेंदुए को पकड़कर एनटीडी स्थित रेसक्यू सेंटर पहुंचे। इधर ग्रामीणों ने वन कर्मियों को बताया कि अभी भी गांव में दो तीन तेंदुए हैं, इसलिए उन्होंने पिंजरा लगाए रखने की मांग की। वन क्षेत्राधिकारी संचिता वर्मा ने बताया कि पकड़ा गया तेंदुआ करीब साढ़े पांच फुट का है। फिलहाल चिकित्सक उसके शरीर की जांच कर रहे हैं।