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अंग्रेजी सीखें पर अपनी भाषा और संस्कृति को कभी न भूले

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अल्मोड़ा। बाल प्रहरी और बाल साहित्य संस्थान की ओर से हुई ऑनलाइन गीत गायन कार्यशाला में बच्चों ने कुमाऊंनी, गढ़वाली और डोगरी गीत प्रस्तुत किए।मुख्य अतिथि शिक्षक और साहित्यकार डॉ. प्रीतम अपछ्याण ने कहा कि नौकरी के लिए हमें अंग्रेजी और देश-विदेश की दूसरी भाषाएं सीखनी चाहिएं। यह जरूरी भी है लेकिन अपनी संस्कृति, भाषा और पहचान को बनाएं रखना होगा।
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कंट्रीवाइड पब्लिक स्कूल सोमेश्वर की कक्षा चार की छात्रा जिज्ञासा जोशी ने गोपाल बाबू गोस्वामी का गीत ‘कैले बजै मुरूली ओ बैणा ऊंचा-ऊंचा डाणा मां...’, कुमाऊं पब्लिक स्कूल द्वाराहाट की कक्षा नौ के छात्र कृष्णा मठपाल ने ‘ओ भीना कसिकै जानू दोरिहाटा..’ गीत गाया। सुदिति पंत (अहमदाबाद), वीरवर्धन सिराड़ी (अल्मोड़ा), देवांक भट्ट (चौखुटिया), सृजन भट्ट (पौड़ी), नेहा आर्या (उभ्याड़ी), रश्मि भोज (दड़मियां), निहारिका पांडे (गरुड़), चित्रांशी लोहनी (चंपावत), शिवांशी जोशी, सुवर्णा जोशी (गरुड़) ने कुमाउनी, गढ़वाली भाषा में गीत प्रस्तुत किए। आर्मी पब्लिक स्कूल रखमुट्ठी (जम्मू) की कक्षा छह की छात्रा अभिषी गुप्ता ने डोगरी भाषा में गीत प्रस्तुत किया।
वर्णिका जोशी (नोएडा), देवयानी जोशी (उदयपुर), श्रीमन भट्ट (पौड़ी), सृष्टि बिष्ट (बरेली) ने कुमाऊंनी और गढ़वाली गीत प्रस्तुत किए। जीआईसी धूमाकोट (पौड़ी) की कक्षा सात की छात्रा पूर्वांशी ध्यानी ने गढ़वाली भाषा में संचालन करते हुए बीच-बीच में गढ़वाली संस्कृति के गीतों के साथ नरेंद्र सिंह नेगी, गोपाल बाबू गोस्वामी और गिरीश तिवारी‘गिर्दा’ के गीतों का गायन किया। कार्यक्रम के संयोजक बाल प्रहरी के संपादक उदय किरौला ने बताया कि अगली बार देश के अन्य आंचलिक गीतों को भी शामिल करने की योजना है। यहां रोमा चंद, शिवांशी शर्मा, आशिमा शर्मा, प्रेरणा जोशी, कोमल रावत आदि मौजूद थे।
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