भारतीय मजदूर संघ की जिला इकाई की बैठक में श्रम कानूनों में बदलाव के नाम पर मजदूरों का शोषण बंद करने की मांग उठाई गई। बैठक में 17 नवंबर को दिल्ली रैली की तैयारियों पर भी चर्चा हुई।
वक्ताओं ने नीति आयोग में मजदूरों और किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने, जीएसटी से होने वाले नुकसान की भरपाई मजदूर कल्याण बोर्ड के माध्यम से करने, समान कार्य के लिए समान वेतन देने, निजी, असंगठित क्षेत्र में कार्य करने वाले आंगनबाड़ी, आशा, भोजन माता, ग्राम प्रहरी, मनरेगा और लघु उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों को न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये देने की मांग उठाई गई।
इसके अलावा मनरेगा योजना में श्रमिकों को 200 दिन न्यूनतम वेतन देने, ईपीएफ की पेंशन न्यूनतम तीन हजार रुपये करने और महंगाई भत्ता देने, सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा दायरे में लाने की मांग की। संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष शेखरानंद पांडे ने बताया कि इन मुद्दों को लेकर 17 नवंबर को दिल्ली में रैली प्रस्तावित है। सभी से रैली को सफल बनाने का आह्वान किया गया। तय हुआ कि जिले में चार सौ से पांच सौ कार्यकर्ता दिल्ली रैली में भाग लेंगे। बैठक में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय जून 2017 से अभी तक भुगतान नहीं होने पर रोष जताया गया।
बैठक में गौरव साह, मोहन राम, कुंदन रावत, कौशल कुमार, पवन सिंह, पुष्पा तिवारी, संगीता साह, तारा फुलोरिया, दीपिका बोरा, शशि, भगवती बिष्ट, लक्ष्मी मेहरा, सीमा पांडे, कमला खोलिया आदि ने भाग लिया। अध्यक्षता महेश चंद्र जोशी ने और संचालन जिला मंत्री उमेश चंद्र जोशी ने किया।