सम्मानित होने के बाद अतिथियों के साथ कुमाऊंनी रामलीला के कलाकार
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रावण वध और विभिषण को लंका का राजपाट सौंपने के साथ ही नगर के सुदूरवर्ती पाली नदुली में चल रही कुमाऊंनी रामलीला शनिवार देर रात संपन्न हो गई है। आखिरी दिन कलाकारों को सम्मानित किया गया। युद्ध से पूर्व विभीषण रावण से कहते हैं कि सुणि ले अभागी, कलू कुभागी, दुश्मण बणाई त्वीले जागा जागी।
सिलोर सांस्कृतिक समिति की ओर से पाली नदुली में पांच दिनी कुमाऊंनी रामलीला का आयोजन किया गया था। बोली भाषा के संरक्षण को लेकर यह अनूठी पहल दो वर्षों से चल रही है। रामलीला के सभी संवाद कुमाऊंनी में लिखे गए हैं, इसके लिए कलाकारों ने लंबा प्रशिक्षण भी लिया। संपूर्ण रामलीला में कलाकारों के अभिनय ने जमकर वाहवाही लूटी। अंतिम दिन राम रावण युद्ध के साथ ही रावण का वध हुआ। इसके बाद विभीषण को लंका का राजपाट सौंपा गया, उनका राजतिलक भी किया गया। बाद में कलाकारों को मुख्य अतिथि व्यापारी चरन भाई ने सम्मानित किया।
इन्होंने निभाई भूमिका
रामलीला में राम की भूमिका नरेंद्र सिंह रावत, मेघनाद की गोपाल दत्त तिवारी, कुंभकर्ण की मनोज रावत, भरत की पंकज सिंह रावत, शत्रुघ्न की अंकित रावत, हनुमान की यशपाल चंद्र, रावण की भूमिका पंचम सिंह, विभीषण की हरीश चंद्र पपनै, लक्ष्मण की दीपक बिष्ट और सीता की भूमिका नवीन चंद्र पपनै ने निभाई।