प्रदेश सरकार ने अल्मोड़ा के बेस अस्पताल में नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट के सहयोग से स्थापित हार्ट केयर सेंटर का अनुबंध एक साल की अवधि बीतने के बाद आगे नहीं बढ़ाया है। करार की शर्तों के मुताबिक सरकार ने हार्ट केयर सेंटर में तैनात डाक्टरों और अन्य स्टाफ के वेतन मद का करीब एक करोड़ से अधिक का भुगतान भी नहीं किया है। इसके मद्देनजर नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट ने 20 दिसंबर से दोनों हृदय रोग विशेषज्ञों समेत अपना पूरा स्टाफ वापस बुलाने का फैसला कर लिया है। इस तरह 20 दिसंबर से हार्ट केयर सेंटर बंद हो जाएगा।
पिछले साल तत्कालीन कांग्रेस सरकार और नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट के सीईओ डॉ.ओपी यादव के बीच अल्मोड़ा में कार्डिएक यूनिट खोलने के लिए करार हुआ। नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट ने कार्डिएक यूनिट में दो हृदय रोग विशेषज्ञ, नर्स और तकनीकी स्टाफ समेत सात कर्मचारियों की तैनाती की। मशीनें और अस्पताल आदि की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई। डॉक्टरों और स्टाफ का वेतन राज्य सरकार को वहन करना था। नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट ने समय पर भुगतान नहीं होने के बावजूद करार के अनुरूप पिछले एक साल से हार्ट केयर यूनिट में दो हृदय रोग विशेषज्ञों और अन्य स्टाफ को तैनात रखा।
हार्ट केयर सेंटर के प्रभारी अधीक्षक डॉ. लक्ष्मण लाल के मुताबिक पिछले एक साल में 7500 से अधिक रोगियों का इलाज किया गया और कई गंभीर रोगियों का तत्काल उपचार करके उनकी जान बचाई गई। आसपास के जिलों से भी हार्ट रोगी यहां आते हैं। करार में यह भी तय हुआ था कि एक साल बाद बेस अस्पताल में जरूरी उपकरण और मशीनें लगाकर यहां ओपन हार्ट सर्जरी भी शुरू कर दी जाएगी।
अल्मोड़ा सहित पूरे संसदीय क्षेत्र के चार जिलों में हृदय रोगियों के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके बावजूद सरकार ने करार आगे नहीं बढ़ाया है। सरकार पर डॉक्टरों और अन्य स्टाफ के वेतन का एक करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है।
अल्मोड़ा के विधायक और विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान ने कहा है कि अनुबंध आगे बढ़ाने और बकाया भुगतान के लिए वह मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से बात कर रहे हैं।
बेस अस्पताल अल्मोड़ा में हार्ट केयर यूनिट संचालित करने के लिए सरकार के साथ अनुबंध एक साल के लिए हुआ था। यह अवधि 12 दिसंबर को पूरी हो चुकी है। अनुबंध आगे बढ़ाने पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। इसलिए 20 दिसंबर से दोनों हृदय रोग विशेषज्ञों समेत पूरा स्टाफ वापस बुलाने का निर्णय लेना पड़ रहा है। इस बारे में उत्तराखंड सरकार को पत्र भेज दिया गया है।
डॉ.ओपी यादव, निदेशक नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट नई दिल्ली