अल्मोड़ा। लॉकडाउन के चलते दो माह से केमू बसों का संचालन बंद है। इससे केमू बस मालिक समेत चालक, परिचालकों की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई है। लॉकडाउन के कारण अब उन्हें चालक, परिचालकों को वेतन देने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदेश सरकार ने 50 फीसदी क्षमता के साथ सार्वजनिक परिवहन के संचालन की अनुमति दे दी है लेकिन इसके बाद भी निजी परिवहन कंपनियों के संचालक वाहनों के संचालन के लिए तैयार नही हैं। उनका कहना है कि सिर्फ आधी सीटों पर ही सवारियां बैठाने से भारी घाटा होगा। यदि सरकार आधी राशि उन्हें अनुदान दे तो वह बसों का संचालन शुरू कर सकते हैं। केमू बस मालिक प्रमोद साह ने बताया कि 50 फीसदी क्षमता के साथ बसों का संचालन करने से केमू मालिकों को काफी नुकसान झेलना पड़ेगा। ऐसे में बसों का संचालन मुश्किल है। अल्मोड़ा से हल्द्वानी आदि रूटों के यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
क्या कहते हैं केमू बस मालिक
लॉकडाउन में केमू की बसें संचालित न होने से आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई है। अब तक साढ़े तीन लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। दो केमू की बसों का संचालन करता हूं। 20-22 हजार रुपये चालक, परिचालकों के मासिक वेतन में ही खर्च हो जाते हैं। चालक, परिचालकों को लॉकडाउन अवधि का वेतन अपनी जेब से दे रहा हूं। अब शासन की नीति के मुताबिक 50 प्रतिशत यात्रियों को लेकर चलने से नुकसान ही भुगतना पड़ेगा।
- नरेंद्र बनौला, केमू बस मालिक, अल्मोड़ा।
मेरी चार बसें केमू में संचालित होती हैं। लाकडाउन में करीब 15 से 20 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हो गया है। लॉकडाउन से बसों के पहिये जाम है। बसें न चलने से चालक, परिचालकों को वेतन का भुगतान भी अपने बचत के रुपये से करना पड़ रहा है। वाहन की मरम्मत आदि में भी काफी पैसा खर्च हो रहा है। इससे सभी संबंधित लोगों पर आर्थिक संकट हो गया है। ऐसे में आधी सवारी लेकर चलने से कोई फायदा नहीं है।
- सागर मेहता, केमू बस स्वामी, अल्मोड़ा।