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पांच दिनों में केमू को हुआ 25 लाख रुपये का आर्थिक घाटा

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अल्मोड़ा। कुमाऊं मोटर्स ऑनर्स यूनियन (केमू) की हड़ताल बृहस्पतिवार को पांचवें दिन भी जारी रही। इन पांच दिनों में केमू को पूरे कुमाऊं मंडल में 25 लाख रुपये का घाटा हुआ है।
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यदि हड़ताल जल्द खत्म नहीं हुई तो केमू की माली हालत और ज्यादा खराब होने की आशंका है। हड़ताल के चलते केमू के 100 कर्मचारियों समेत बस मालिक, चालक, परिचालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है।
केमू को पहाड़ की जीवनरेखा कहा जाता है। पहाड़ की 125 रूटों पर केमू की 350 बसों का संचालन रोजाना होता है। अल्मोड़ा केमू स्टेशन से जिले की विभिन्न रूटों पर करीब 44 बसें रोजाना चलतीं हैं।
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केमू के अधिशासी निदेशक हिम्मत सिंह नयाल के मुताबिक केमू के पास 100 कर्मचारियों का स्टाफ है। केमू बस मालिक, चालक, परिचालक आदि की आजीविका का प्रमुख साधन है।
केमू की 350 बसों के संचालन से रोजाना औसतन पांच लाख रुपये की कमाई होती है। पांच दिनों से केमू की बसों के पहिए जाम है। हड़ताल के कारण केमू को पांच दिनों में 25 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।
यदि हड़ताल जल्द खत्म नहीं हुई तो घाटा करोड़ों में पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि केमू हमेशा से ही प्रशासन और सरकार को सहयोग करता आया है।
कोरोनाकाल में पुराने किराये पर 50 फीसदी सवारी के साथ बसों का संचालन करना मुश्किल हो रहा है। इससे डीजल का पैसा भी नहीं निकल पाता है।
केमू की 44 बसें नहीं चलीं, रोडवेज की 12 सेवाएं रद्द
अल्मोड़ा। जिले में केमू की 44 बसों का संचालन बृहस्पतिवार को भी ठप रहा। बसों का संचालन न होने से यात्रियों को परेशानी हुई। केमू स्टेशन अल्मोड़ा में केमू की बसें खड़ी रहीं। गंतव्य को जाने के लिए यात्री वाहनों की तलाश में भटकते रहे।
इधर चालकों की कमी से रोडवेज की धरमघर, टनकपुर, मासी, लमगड़ा-दिल्ली, बेतालघाट, लखनऊ, धरमघर-दिल्ली, अटपेसिया-दिल्ली, गुरुग्राम, सुबह की दिल्ली, शाम पांच बजे देहरादून, शाम साढ़े पांच बजे की दिल्ली सेवाओं का संचालन रद्द हुआ।
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