भले ही गांवों से शहरों की ओर पलायन पहाड़ की एक बड़ी समस्या हो पर कुछ लोग अब भी अपनी माटी को भुला नहीं पाए हैं और शहरों की चकाचौंध भरी जिंदगी को अलविदा कह कर गांव लौट रहे हैं। उन्हीं में से एक हैं केशव दत्त भट्ट। कोटा राजस्थान से सेवानिवृत्त होने के बाद केशव दत्त भट्ट अपने पैतृक गांव गढ़वाली लौट आए हैं। पिछले एक दशक में गांव में बंजर पड़ी भूमि को आबाद कर फलोत्पादन और सब्जी उत्पादन को बढ़ावा दे रहे हैं। उद्यान विभाग से उन्हें ब्लॉक स्तरीय किसान श्री पुरस्कार भी मिल चुका है।
श्री राम फर्टिलाइजर कोटा (राजस्थान) से डिप्टी मैनेजर पद से सेवावृत्त होकर भट्ट 2004 में अपने गांव गढ़वाली लौटे। गांव से हटकर कुछ दूरी पर उनकी 25 नाली बंजर भूमि थी। 2005 से उन्होंने बंजर भूमि को धीरे-धीरे बगीचे में परिवर्तित कर दिया है। इस भूमि में उन्होंने आम, आड़ू, पुल्लम, खुमानी, नाशपाती के अलावा नीबू प्रजाति के चार सौ अधिक पेड़ लगाए हैं। जिनमें धीरे-धीरे अब फल आने शुरू हो गए हैं।
इसके अलावा उद्यान विभाग के सहयोग से उन्होंने पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई, जल संरक्षण के लिए पांच वाटर हार्वेस्टिंग टैंक भी बनाए हैं। उद्यान की घेरबाड़ भी की है। इस कार्य में उन्हें उद्यान सचल दल केंद्र गोविंदपुर का भी पूर्ण सहयोग मिल रहा है। उनके कार्य में पत्नी भगवती भट्ट भी उन्हें मदद करती है। उनके तीन पुत्र अच्छे रोजगार में हैं, लेकिन पुत्रों के बुलाने के बावजूद भट्ट दंपति ने गांव में रहने का निश्चय किया है। भट्ट का यह कार्य अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणादायी है।
पत्नी भगवती बना रही महिलाओं को आत्मनिर्भर
अल्मोड़ा। गढ़वाली गांव निवासी केशव दत्त भट्ट की पत्नी भगवती भट्ट प्रयास महिला उत्थान समिति के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कार्य कर रही हैं। समिति के माध्यम से जहां चार दर्जन से अधिक महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई प्रशिक्षण दिया जा रहा है। एसबीआई आरसेटी के सहयोग से जैविक खाद बनाने, ऊन कताई जैसे कार्यों को सीखा कर महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधारने का कार्य कर रही हैं।