कुमाऊं की सबसे बड़ी छावनी परिषद सफाई कर्मचारियों के अभाव से जूझ रही है। जिसके चलते क्षेत्र की सफाई व्यवस्था में निरंतर गिरावट आ रही है।
जिस कारण नगर में सुबह, शाम दो बार सफाई का काम प्रभावित हो रहा है। 1980 तक यहां सिविल, सेना क्षेत्र के लिए कुल 229 सफाई कर्मचारी तैनात थे। अब यह संख्या 153 रह गई है। दूसरी तरफ 1869 में अंग्रेज हुक्मरानों द्वारा स्वीकृत भिस्ती का पद, कूड़ा ढोने वाली भैंसा गाड़ी की व्यवस्था भी खत्म कर दी गई है।
नगर क्षेत्र की सफाई का जिम्मा छावनी परिषद के पास है। 1869 में जब अंग्रेजों ने यहां छावनी बसाई थी तो सफाई के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की व्यवस्था की थी। सिविल के लिए 126, सेना क्षेत्र के लिए 103 सफाई कर्मचारी तैनात किए गए।
नगर क्षेत्र में सुबह, शाम दो बार सफाई होती थी, जबकि दोपहर में भिस्ती पानी के माध्यम से नगर की सफाई करते थे, कूड़ा ढोने के लिए भैंसा गाड़ी होती थी। कई कर्मचारियों को संविदा के माध्यम से तैनात किया गया था। बताते हैं कि 1980 तक व्यवस्था ठीक ठाक चलती थी, लेकिन इसके बाद निरंतर कर्मचारियों की संख्या घटती रही।
छावनी परिषद के मुताबिक 2005-06 से नई भर्ती नहीं हुई है। एक तरफ कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, पद खाली होने के कारण व्यवस्था प्रभावित हो रही है, हालांकि संविदा पर कर्मचारी तैनात किए हैं, लेकिन उचित मेहनताने के अभाव में संविदा कर्मी टिक नहीं पा रहे हैं।
इन दिनों सिविल क्षेत्र में 68, सेना क्षेत्र में कुल 85 कर्मचारी तैनात हैं, जबकि 30 कर्मचारी संविदा पर तैनात हैं। दूसरी तरफ क्षेत्र में निरंतर बसासत बढ़ रही है, कर्मचारी कम होने से समस्या बढ़ रही है। हालांकि छावनी ने नगर, मोहल्लों में कूड़ेदान रखे हैं, इसके लिए कई मूत्रालय बनाए हैं, नियमित सफाई के अभाव में मूत्रालय, नालियां गंदगी से पटे रहते हैं।