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हिमालयी राज्यों को प्लास्टिक कचरे से मुक्त रखें

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कार्यशाला में मौजूद विशेषज्ञ। - फोटो : अमर उजाला
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 जीबी पंत हिमालय पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान कोसी कटारमल में भारतीय हिमालयी राज्यों में संचालित परियोजनाओं के अनुश्रवण और मूल्यांकन कार्यशाला के समापन

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पर वैज्ञानिकों ने हिमालयी राज्यों को खासतौर पर प्लास्टिक कचरे से मुक्त करने पर जोर दिया। उन्होंने हिमालयी राज्यों की संस्कृति, पुरानी धरोहरों और भवन निर्माण की पारंपरिक पद्धति आदि को भी संरक्षित करने की बात कही। 

विशेषज्ञों ने हिमालयी राज्यों में प्लास्टिक जैसे हानिकारक कचरे के प्रबंधन और उसके अनेक बहुपयोगी उत्पाद बनाने वाली परियोजनाओं के कार्यों की सराहना की। विषेशज्ञों ने कहा कि हिमालयी राज्यों में पर्यटन को सतत रूप देने के साथ इसके दुष्प्रभावों पर भी बराबर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यहां की जलवायु, भूकंप, बाढ़ और अन्य चुनौतियों के अनुरूप प्रकृति को हानि पहुंचाए बगैर निर्माण आदि करने की दिशा में अनुसंधान को व्यवहारिक रूप देना होगा। सड़कों आदि का निर्माण भी इस तरह करना होगा जिससे प्रकृति को कम से कम हानि पहुंचे। अनेक परियोजना प्रमुखों ने बताया कि किस प्रकार हिमालयी राज्यों में मंदिरों और पुरानी इमारतों के संरक्षण, होम स्टे, ईको टूरिज्म आदि क्षेत्रों में कार्य किया जा रहा है।  
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डॉ.जेके गर्ग और प्रो. केपी शर्मा की अध्यक्षता में अनुश्रवण समितियों में डॉ. किशोर कुमार, डॉ. सीसी पंत, डॉ. वरुण जोशी, डॉ.जेसी कुनियाल, ललित कपूर, डॉ.आरएस रावल, डॉ. अनीता पांडे, डॉ. पीसी जोशी आदि ने परियोजनाओं का मूल्यांकन किया। समापन पर मिशन नोडल अधिकारी इं किरीट कुमार ने सभी विशेषज्ञों और परियोजना प्रमुखों का आभार जताया। संस्थान के निदेशक डॉ. आरएस रावल ने इस सफल आयोजन के लिए सभी वैज्ञानिकों और कर्मचारियों को धन्यवाद दिया। इस मौके पर अन्य लोगों के अलावा डॉ. संदीपन मुखर्जी, डॉ. रवींद्र वर्मा, डॉ. ललित गिरि, डॉ. आईडी भट्ट, पुनीत सिराड़ी, डॉ. आशुतोष तिवारी, अरविंद टम्टा, डॉ. हर्षित पंत, रंजन जोशी, डॉ. सुव्रत शर्मा आदि मौजूद थे। 
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