महिलाओं को बायोमास कोयला बनाने का प्रशिक्षण देतीं कविता। संवाद
अल्मोड़ा। पहाड़ में जंगलों के लिए विनाशकारी पिरूल अब लोगों के रोजगार का जरिया बन रहा है। सुनौली निवासी कविता जग्गी पिरूल से तैयार बायोमास कोयला (पैलेट) तैयार कर जिले की महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही हैं। पिरूल एकत्रित कर समूह की महिलाओं की आर्थिकी सुधारने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए भी कार्य कर रही है।
जंगल में आग का कारण बनने वाले पिरूल से कविता महिलाओं को बायोमास कोयला बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं। पिरूल से बने इस कोयले में कार्बन डाइऑक्साइड गैस नहीं होती जो शरीर को नुकसान नहीं पहुंचता। कविता पैलेट तैयार कर हर माह एक लाख रुपये तक की कमाई कर रही हैं।
वहीं तीन महिलाओं सहित दो पुरुषों को उन्होंने रोजगार से जोड़ा है। जो दस हजार रुपये महीना कमाते हैं। इसके साथ ही पीरूल इकठ्ठा करने की लिए उन्होंने समूह की महिलाओं को अपने साथ जोड़ा है। जहां उन्हें प्रति दिन के हिसाब से रोजगार उपलब्ध हो रहा है।