अल्मोड़ा। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति का आठवां जिला सम्मेलन शनिवार को राजकीय संग्रहालय सभागार में हुआ। वक्ताओं ने शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई, बेरोजगारी, महिला हिंसा और आम जनता विशेषकर महिलाओं पर हो रहे चौतरफा हमलों, नफरत की राजनीति के खिलाफ संघर्ष तेज करने की अपील की गई।
बतौर पर्यवेक्षक समिति की राज्य अध्यक्ष सुनीता पांडे ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिवेश आम आदमी को उसके नागरिक अधिकारों से उसे कोसों दूर कर रहा है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निर्णय लेने के फैसलों पर बेड़ियां कस रही हैं। इससे इंसानी गरिमा और मूलभूत जरूरतों की कोई अहमियत नहीं दिख रही।
सुनीता ने कहा कि सरकारें लव जिहाद और लव लैंड के जुमले फेंक कर नफरत फैलाकर आपसी भाईचारे पर दूरी बना रही है। ऐसे में आम जनता और परिवार की धुरी कहे जाने वाली महिला की जिंदगी बिखर गई है। प्रगतिशील ताकतों और महिला आंदोलनों को कुचलने प्रयासों के बीच महिलाओं को संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।
एसएसजे परिसर की पूर्व शिक्षा शास्त्र संकाय अध्यक्ष डॉ. विजया ढौंडियाल ने कहा कि उत्तराखंड राज्य बनने के 25 साल बाद भी मुजफ्फर नगर कांड के दोषियों को सजा नहीं मिल पाई है। अध्यक्षता करते हुए कला और मनोविज्ञान पूर्व संकाय अध्यक्ष डॉ. आराधना शुक्ला ने कहा कि आज के दिन की सबसे बड़ी जरूरत है कि हम महिलाएं सांविधानिक अवसरों का इस्तेमाल करते हुए अपने आत्मसम्मान के लिए एकजुट होकर अधिकारों को हासिल करें।
जिले की विगत तीन वर्षों की सांगठनिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इसमें बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा, पॉक्सो एक्ट के सुचारू क्रियान्वयन करने समेत कई प्रस्ताव पारित किए गए।
सम्मेलन में आशा भारती, जया पांडे, कांता नेगी, पार्वती रावत, नीमा, जयंती, सरस्वती, भगवती, सरोज, भगवती, उमा आगरी मौजूद रहीं।
डॉ. आराधना जिलाध्यक्ष, ऋतु बनीं सचिव
अल्मोड़ा। जिला सम्मेलन में समिति की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। इसमें डॉ. आराधना शुक्ला जिलाध्यक्ष, ऋतु रावत सचिव, राधा नेगी कोषाध्यक्ष मनोनीत की गई। 14 नवंबर को देहरादून में होने वाले राज्य सम्मेलन के लिए 10 प्रतिनिधियों का चयन किया गया।