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श्रमदान और चंदा जुटाकर ग्रामीणों ने गणाऊं में बनाया गंगनाथ देवता का मंदिर

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अल्मोड़ा के गणाऊं में बना गंगनाथ देवता का मंदिर। - फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। जिले के लमगड़ा ब्लॉक के गणाऊं गांव में ग्रामीणों ने श्रमदान और चंदा जुटाकर भगवान श्री गंगनाथ का भव्य मंदिर बनाया है। यह मंदिर गोथिक शैली में बनाया गया है। इसका गुंबद भी विशिष्ट पर्वतीय शैली में बना है। मंदिर के गर्भगृह के मध्य में भगवान गंगनाथ की मूर्ति स्थापित की गई है। यह मंदिर जनता के लिए खुल गया है। लोग दर्शन करने आ रहे हैं। अब आसपास में गणाऊं की पहचान इस खूबसूरत मंदिर से होने लगी है।
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जैंती तहसील मुख्यालय से तीन किमी दूर छोटा सा गांव है गणाऊं। यहां के लोगों ने श्रमदान और चंदा एकत्रित कर भगवान श्री गंगनाथ का भव्य और आकर्षक मंदिर बनाया है। मंदिर में ढाई फीट ऊंची गंगनाथ देवता की तांबे की मूर्ति लगी है। इस मूर्ति को ताम्रनगरी के प्रसिद्ध कारीगर मनोज लाल टम्टा ने बनाया है। मंदिर कमेटी और ग्रामोत्थान सेवा समिति के मुख्य संयोजक राजेंद्र प्रसाद भट्ट ने बताया कि खास बात यह है कि मंदिर को गौथिक शैली में बनाया गया है। मंदिर में दो प्रवेश द्वार हैं। मुख्य द्वार पश्चिम दिशा और निकास द्वार उत्तर दिशा की ओर है। दोनों ही प्रवेश द्वारों की चौखट में पर्वतीय शैली में खोली बनाई गई है। इसमें नक्काशी करके देवी-देवताओं के चित्र उकेरे गए हैं। मंदिर का गुंबद भी विशिष्ट पर्वतीय शैली में बनाया गया है। मंदिर के गर्भगृह के मध्य भगवान गंगनाथ विराजमान हैं। उनके दाएं ओर भगवान श्री गणेश और बाईं ओर भाना वामिनी विराजमान हैं। मंदिर के उत्तर द्वार के सम्मुख यज्ञशाला बनी है। ग्रामीणों के श्रमदान और दस लाख चंदे की राशि से करीब दो साल में मंदिर बनकर तैयार हुआ। मंदिर में ढौरा की पत्थर खानी के पत्थर लगाए गए हैं। मंदिर की नींव रखने से लेकर इसे मूर्तरूप देने तक हर परिवार के एक सदस्य ने रोज श्रमदान भी किया।
पहाड़ी शिल्पकला और काष्ठकला की झलक दिख रही मंदिर में
अल्मोड़ा। मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद भट्ट ने बताया कि पर्वतीय शिल्पकला में मंदिर निर्माण के लिए उन्हें मिस्त्री (कारीगर) नहीं मिले। उन्होंने आसपास के गांवों समेत कई स्थानों पर कारीगर खोजे लेकिन सफलता नहीं मिली। काफी ढूंढखोज के बाद धौलादेवी ब्लॉक के खौली गांव में लकड़ी नक्काशी में दक्ष कारीगर मिले। पत्थर में नक्काशी के लिए गौजानी गांव के कारीगर बुलाए। उन्होंने कहा कि पर्वतीय शिल्पकला में बना यह मंदिर आने वाली पीढ़ियों को पहाड़ की विशिष्ट शिल्प और काष्ठकला से रू-ब-रू कराएगा।
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गंगनाथ कें बोलि-टोलि नि लागनि
अल्मोड़ा। कुमाऊं अंचल में ग्वल देवता के बाद गंगनाथ देवता की सर्वाधिक मान्यता है। गांवों में गंगनाथ देवता के सामूहिक मंदिर अथवा व्यक्तिगत रूप से स्थापित मंदिर कई जगह हैं। मान्यता है कि गंगनाथ मात्र फूल से मान जाने वाले सरल देवता भी हैं तो उनका हठी स्वभाव भी प्रसिद्ध है। कुमाऊं में गंगनाथ देवता के बारे में कहा जाता है गंगनाथ कें बोलि-टोलि नि लागनि अर्थात गंगनाथ देवता को ऊंची और व्यंग्य भरी बातें नहीं सुहाती हैं। भक्त यदि अपनी गलती की क्षमायाचना करें तो वह प्रसन्न हो जाते हैं।
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