अल्मोड़ा जिले के जागेश्वर, चितई, दूनागिरि, कटारमल, शीतलाखेत, पांडवखोली आदि स्थलों को पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की योजना पिछले कई साल में अधर में लटकी है। इस योजना को मंजूरी मिलने से इन स्थानों में आने वाले पर्यटकों की संख्या में इजाफा होने के साथ पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद थी, लेकिन केंद्र सरकार से इसके लिए बजट नहीं मिला है।
कुमाऊं मंडल विकास निगम ने जिले के जागेश्वर, चितई, कटारमल, दूनागिरि, शीतलाखेत, पांडवखोली सहित कुछ अन्य पर्यटन और धार्मिक स्थलों को आपस में जोड़कर पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की योजना बनाई थी। योजना के मुताबिक बाहर से आने वाले पर्यटकों को टूर पैकेज के तहत इन सभी स्थलों का भ्रमण कराया जाना था।
इन स्थलों में रहने की सुविधाएं बेहतर बनाने के अलावा पार्क आदि विकसित करने की भी योजना थी। यही नहीं जो पर्यटक ट्रैकिंग के शौकीन हों उनके लिए ग्रुप में ट्रैकिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराने का फैसला किया गया था। इसके लिए कुछ ट्रैकिंग रूट भी चिन्हित किए गए थे।
उधर चौबटिया में घने जंगल के बीच स्थापित भालू डैम के पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं। यहां जंगल के बीच खूबसूरत झील है। अंग्रेज शासनकाल के दौरान यहां से कई पेयजल योजनाएं भी संचालित होती थी, लेकिन धीरे-धीरे यह झील उपेक्षा का शिकार हो गई। इस झील का सुंदरीकरण करके यहां ट्रैकिंग रूट बनाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है।
द्वाराहाट का दूनागिरि मंदिर भी पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। साल भर यहां सैलानियों का तांता लगा रहता है। इधर पांडवों की अज्ञात स्थली के रूप में प्रख्यात पांडवखोली के पर्यटन विकास के लिए भी तमाम प्रस्ताव भेजे गए थे, लेकिन यह सभी योजनाएं अधर में हैं। लोगों का मानना है कि अगर इन योजनाओं को धरातल पर उतारा जाए तो एक तरफ इन क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों की संख्या कई गुना बढ़ जाएगी। साथ ही इससे पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय लोगों की आय भी बढ़ेगी।