फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ऑन लाइन प्रक्रिया के बाद बच्चे गोद लेना कठिन

Mon, 09 Apr 2018 11:53 PM IST
दीप जोशी 
विज्ञापन
बच्चा
विज्ञापन

राजकीय शिशु सदन से बच्चे गोद लेने की ऑन लाइन प्रक्रिया अनिवार्य कर दिए जाने के बाद अब स्थानीय स्तर पर बच्चे गोद लेना संभव नहीं है। अब बच्चा गोद लेने के लिए सेंट्रल एडोप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (सीएआरए) के अंतर्गत ऑन लाइन आवेदन करना होता है जिसमें बच्चे चाहने वालों की राष्ट्रीय स्तर पर सूची बनती है।

विज्ञापन


इस व्यवस्था के लागू होने के बाद से लोग पहले की तरह सीधे शिशु सदन में बच्चे के लिए आवेदन नहीं कर सकते। पूर्व की व्यवस्था में जहां अधिकांश बच्चे राज्य के लोगों को मिल जाते थे, लेकिन ऑन लाइन प्रक्रिया के बाद पिछले दो साल में अल्मोड़ा शिशु सदन से गोद दिए गए आठ बच्चों में राज्य के लोगों को सिर्फ तीन बच्चे मिल सके।  

बता दें कि राज्य में अल्मोड़ा और देहरादून में दो राजकीय शिशु सदन हैं। जिनमें विभिन्न वजहों से लावारिस और अन्य असहाय बच्चों को रखा जाता है। जांच आदि के बाद यहां से निसंतान दंपतियों को बच्चे गोद दिए जाते हैं।
विज्ञापन


पूर्व की व्यवस्था में निसंतान दंपति गोद लेने के लिए स्थानीय स्तर पर ही आवेदन कर लेते थे और निर्धारित प्रक्रिया के बाद उन्हें बाल कल्याण समिति की देखरेख में बच्चा गोद दे दिया जाता था, लेकिन पिछले दो साल से बच्चे गोद देने की प्रक्रिया को ऑन लाइन कर दिया गया है।

अब अल्मोड़ा और देहरादून स्थित शिशु सदनों से बच्चे गोद लेने के लिए सेंट्रल एडोप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (कारा) के जरिए ऑन लाइन आवेदन करना होता है। यही नहीं विदेशी दंपति भी बच्चे गोद लेने के लिए ऑन लाइन आवेदन कर सकते हैं। अब राष्ट्रीय स्तर पर ऑन लाइन आवेदन अनिवार्य होने के बाद से राज्य के शिशु सदनों से राज्यवासियों को बच्चे गोद कम मिल पा रहे हैं।

राजकीय शिशु सदन अल्मोड़ा की अधीक्षिका मंजू उपाध्याय ने बताया कि ऑन लाइन प्रक्रिया होने के बाद से पिछले दो सालों में अल्मोड़ा के राजकीय शिशु सदन से आठ बच्चे गोद दिए गए। इनमें उत्तराखंड के लोगों को सिर्फ तीन बच्चे मिले जबकि दो बच्चे स्पेन, दो यूपी और एक बिहार निवासी दंपतियों को मिला है।   

गोद लेने को इस तरह कर सकते हैं ऑन लाइन आवेदन  

कोई दंपति ऑन लाइन गोद लेने के लिए सेंट्रल एडोप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (सीएआरए) में जाकर निर्धारित प्रारूप को भरकर आवेदन कर सकता है। आवेदक दंपति को बच्चा गोद लेने के लिए प्राथमिकता के आधार पर तीन राज्यों के शिशु सदनों में लड़का अथवा लड़की (बच्चे की उम्र सहित) आवेदन करना होता है।

आवेदक दंपतियों की राष्ट्रीय स्तर पर सूची बनती है और आवेदन क्रम से विचार किया जाता है। गोद देने से पूर्व संबंधित दंपति की उम्र आदि की भी जांच की जाती है। मसलन ज्यादा उम्र दराज दंपति को छोटा शिशु गोद नहीं दिया जाता। यह भी ध्यान रखा जाता है कि संबंधित दंपति बच्चे की देखभाल अच्छी तरह कर पाएगा अथवा नहीं।

गोद देने के बाद भी कुछ सालों तक बाल कल्याण समिति बच्चे की परवरिश के बारे में जानकारी हासिल करती रहती है। इस समय कुमाऊं मंडल के एकमात्र राजकीय शिशु सदन अल्मोड़ा में 17 बच्चे रह रहे हैं। इनमें चार बच्चों को गोद लेने योग्य घोषित करते हुए उनका ब्यौरा फोटो सहित कारा (सीएआरए) में डाल दिया गया है।  

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें