एसएसजे परिसर अल्मोड़ा में हंगामा के बीच छात्रों को समझाते परिसर निदेशक प्रो. आरएस पथनी।
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एसएसजे परिसर के छात्र संघ पदाधिकारियों और कई अन्य छात्रों ने जीआईएस विभाग में कार्यरत अतिथि व्याख्याता पवन कुमार को बर्खास्त करने के संबंध में लिखित आदेश जारी करने की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को भी परिसर निदेशक कार्यालय में काफी देर तक हंगामा किया। दोपहर बाद विवि प्रशासन ने पवन कुमार को बर्खास्त करने के संबंध में लिखित पत्र जारी कर दिया। इसके बाद इस प्रकरण का पटाक्षेप हो गया।
बता दें कि एसएसजे परिसर में जीआईएस विभाग में कार्यरत अतिथि व्याख्याता पवन कुमार पर छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए छात्रों ने उन्हें हटाने की मांग को लेकर बुधवार को जमकर बवाल किया। बुधवार को परिसर प्रशासन ने पवन कुमार को हटाने की संस्तुति कर दी थी। इधर बृहस्पतिवार को छात्र संघ अध्यक्ष राजन चंद्र जोशी, महासचिव अक्षय कुमार टम्टा, कोषाध्यक्ष अभिषेक बनौला, आशीष पंत सहित कई छात्र परिसर निदेशक कार्यालय पहुंचे और उन्होंने परिसर निदेशक प्रो.आरएस पथनी से पवन कुमार को हटाने के संबंध में आदेश की प्रतिलिपि उपलब्ध कराने की मांग की। परिसर निदेशक प्रो. पथनी ने कहा कि नैनीताल स्थित विवि मुख्यालय से जल्द ही पत्र पहुंचने वाला है। पत्र पहुंचने में विलंब होने पर छात्रों ने एक बार फिर परिसर को बंद कराने की धमकी दे डाली। परिसर प्रशासन के अधिकारियों ने किसी तरह छात्रों को समझाया। आखिरकार दोपहर बाद विवि मुख्यालय नैनीताल से विवि के उपकुलसचिव का पत्र पहुंच गया। जिसमें यह कहा गया है कि कुलपति द्वारा पवन कुमार का पक्ष सुनने के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाने का आदेश जारी किया गया है। पत्र की प्रतिलिपि मिलने के बाद छात्रों ने आंदोलन समाप्त कर दिया। इस मौके पर परिसर प्रशासन की ओर से परिसर निदेशक के अलावा कुलानुशासक प्रो. देवेंद्र बिष्ट, जीआईएस के हेड प्रो. जेएस रावत, प्रो. रुबीना अमान आदि मौजूद थे।
छात्रा की शिकायत पर महिला आयोग ने दिए कार्रवाई के आदेश
अल्मोड़ा। विवादों के बाद एसएसजे परिसर के जीआईएस विभाग से हटाए गए अतिथि व्याख्याता पवन कुमार के खिलाफ एक छात्रा ने महिला आयोग से भी अभद्रता की शिकायत की है। छात्रा की शिकायत पर महिला आयोग ने एसएसपी अल्मोड़ा को कार्रवाई करने के लिए लिखा है। महिला आयोग की सदस्य सचिव कामिनी गुप्ता द्वारा बुधवार को जारी किए गए पत्र में पांच अप्रैल तक कार्रवाई करके रिपोर्ट भेजने को कहा गया है।