अल्मोड़ा। भले ही किसानों की आय दोगुनी कर उन्हें सशक्त बनाने के दावे हो रहे हैं लेकिन धरातल पर यह दावे बेअसर हैं। धौलादेवी विकासखंड में सूखीं नहरें इसका प्रमाण हैं। कहीं आपदा तो कहीं सड़क निर्माण के चलते यहां करोड़ों की लागत से बनीं 12 नहरें पूरी तरह सूख चुकी हैं। ऐसे में किसानों को सिंचाई की चिंता सता रही है।
धौलादेवी ब्लॉक में 30 से अधिक गांवों में सिंचाई के लिए करोड़ों की लागत से 40 नहरों का निर्माण किया गया है। इन नहरों से किसानों को खासा लाभ पहुंचा और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने से उन्होंने अपने बंजर खेत भी आबाद किए लेकिन रखरखाव के अभाव में अब इनमें से 12 नहरें सूख चुकीं हैं। यह नहरें किसानों की आय दोगुनी करने के दावें को खोखला साबित कर रही हैं। इन क्षतिग्रस्त नहरों का सुधारीकरण न होने से खेतों में पानी पहुंचना बंद हो गया। ऐसे में बगैर सिंचाई के फिर से खेत बंजर होने लगे हैं। इससे दो हजार से अधिक किसान मायूस हैं। संवाद
नहर पांच किमी लंबी, सिंचाई सिर्फ दो किमी दायरे में
अल्मोड़ा। धौलादेवी विकासखंड के टांक, ज्योली बगड़, धूूरा और बीबड़ी गांव की 34 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए करीब 25 साल पहले 5.5 किमी लंबी नहर का निर्माण किया गया। वर्तमान में इस नहर से दो किमी दायरे में ही सिंचाई के लिए पानी पहुंच रहा है। ऐसे में सिंचाई की व्यवस्था न होने से किसान धीरे-धीरे खेती से मुंह मोड़ रहे हैं।
सिंचाई विभाग ने लोनिवि से मांगे 19 लाख रुपये
अल्मोड़ा। धौलादेवी विकासखंड की सबसे लंबी सिंचाई नहर सड़क निर्माण के दौरान क्षतिग्रस्त हो गई थी। सिंचाई विभाग ने नहर के सुधारीकरण के लिए 19 लाख रुपये का प्रस्ताव लोनिवि को भेजकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। लोनिवि ने सिंचाई विभाग को भुगतान नहीं किया है। इसकी मार किसानों को सहनी पड़ रही है।
नहरों के सुधारीकरण के प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग किसानों को राहत पहुंचाने का हरसंभव प्रयास करेगा। -मोहन सिंह रावत, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड, अल्मोड़ा।