अल्मोड़ा। वीएल स्याही लौह हल की खरीद पर अनुदान राशि 50 फीसदी से बढ़ाकर 80 फीसदी कर दी गई है। इसके बाद किसानों में लौह हल की मांग बढ़ी है। स्याही देवी विकास समिति शीतलाखेत के प्रयासों से नवसृजन बहुद्देश्यीय स्वायत्त सहकारिता शीतलाखेत द्वारा लौह हलों का निर्माण किया जा रहा है। अगस्त में 330 किसानों ने अस्सी फीसदी अनुदान पर लौह खरीदे।
ग्रामीण इलाकों में लोग हल के लिए बांज और उतीश के पड़ों का उपयोग करते हैं। इससे जंगलों और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। जगंलों के सरंक्षण के लिए विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा 2012 में विकसित वीएल स्याही लौह हल काश्तकारों के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। स्याही देवी विकास समिति शीतलाखेत द्वारा किसानों को लौह हल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। समिति के संयोजक गिरीश चंद्र शर्मा ने बताया कि अब तक 3330 लौह हल किसानों को उपलब्ध कराए गए हैं। इसे जंगलों कटान को बचाने में भी मदद मिली है।
उन्होंने बताया कि मुख्य कृषि अधिकारी प्रियंका सिंह ने जिला योजना में एक हजार हलों के लिए अनुदान राशि बढ़ाकर 80 फीसदी की है। लौह हल की कुल लागत 1715 रुपये है। 80 फीसदी अनुदान के बाद किसानों को 343 रुपये में लौह हल दिया जा रहा है। लौह हलों का वितरण कृषि विभाग के न्याय पंचायत स्तरीय अधिकारियों की मौजूदगी में सामाजिक कार्यकर्ता गोपाल गुरुरानी, गोपाल बिष्ट, रवि परिहार, महेंद्र नेगी, नैन सिंह, प्रताप बिष्ट, सुंदर सिंह, हरीश बिष्ट, किशन सिंह, गजेंद्र पाठक के सहयोग से किया जा रहा है।