अंतरराष्ट्रीय संस्था (आईसीमोड) के तहत हिमालय के कैलाश भू क्षेत्र के संरक्षण के लिए पांच साल से चल रही पवित्र कैलाश भू क्षेत्र संरक्षण एवं विकास पहल परियोजना के अच्छे परिणामों को देखते हुए आईसीमोड ने हाल ही में सिक्किम इलाके से लगे हिमालय क्षेत्र में कंचनजंघा भू क्षेत्र एवं विकास पहल नाम से नई परियोजना शुरू की है। यह परियोजना भारत, नेपाल और भूटान के सीमांत हिमालयी क्षेत्र में तीनों देशों के सहयोग से शुरू की गई है। परियोजना के तहत तीनों देश कंचनजंघा इलाके में पर्यावरण संरक्षण के साथ ही स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के साधन जुटाने के लिए काम करेंगे। परियोजना के तहत सांस्कृतिक विविधता वाले इस इलाके में पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा। भारत की ओर से इस परियोजना में जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान कोसी अल्मोड़ा की सिक्किम शाखा नोडल एजेंसी के तौर पर कार्य कर रही है।
उल्लेखनीय है कि भारत, चीन और नेपाल अंतरराष्ट्रीय संस्था (आईसीमोड) के तहत 2013 से हिमालय के कैलाश भू क्षेत्र के संरक्षण के लिए आपसी सहयोग से कैलाश पर्वत के आसपास अपने-अपने क्षेत्रों में पर्यावरण जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न तरह के अध्ययन और लोगों को आजीविका से जोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं। हिमालय क्षेत्र के पर्यावरण संरक्षण और सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका सुधार संबंधी कार्यों में इस परियोजना की पिछले पांच सालों की अच्छी उपलब्धियों को देखते हुए आईसीमोड ने हाल ही में इसी परियोजना के तर्ज पर सिक्किम इलाके से लगे हिमालय क्षेत्र में कंचनजंघा भू क्षेत्र एवं विकास पहल नाम से परियोजना शुरू की है।
जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान कोसी कटारमल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आरएस रावल ने बताया कि कंचनजंघा भू-क्षेत्र एवं विकास पहल परियोजना भारत, नेपाल और भूटान के 25085 वर्ग किमी क्षेत्र में शुरू की गई है। इसका 56 प्रतिशत क्षेत्र (लगभग 14126 वर्ग किमी) भारत में, 25 प्रतिशत भूटान और 21 प्रतिशत क्षेत्र नेपाल में है।
भारत की ओर से जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान कोसी अल्मोड़ा की सिक्कम शाखा नोडल एजेंसी के तौर पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि आईसीमोड के तहत भारत, चीन और नेपाल के सहयोग से पांच सालों से चल रही पवित्र कैलाश भू क्षेत्र संरक्षण एवं विकास पहल परियोजना की उपलब्धियों को कंचनजंघा परियोजना में भी अपनाया जाएगा। कंचनजंघा के इस इलाके को खास तौर पर सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है। इसलिए इस परियोजना के तहत तीनों देश पर्यावरण संरक्षण के कार्यों के साथ ही सामान्य पर्यटन विकास के साथ ही इको टूरिज्म और हेरिटेज टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए भी काम करेंगे।