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माओवाद के मामले बढ़ने से पुलिस प्रशासन की चिंता बढ़ी

Fri, 26 May 2017 10:44 PM IST
अल्मोड़ा़,अमर उजाला
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Maoists - फोटो : amarujala
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 जिले में माओवाद का प्रचार-प्रसार बढ़ने से अधिकारियों की चिंता बढ़ती जा रही है। जिलाधिकारी सविन बंसल और एसएसपी पी रेणुका देवी ने संयुक्त बैठक करके अधिकारियों को माओवादी गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी सविन बंसल ने सूचना तंत्र को मजबूत करने पर जोर देते हुए सरकारी भवनों में पोस्टर चिपकाने के मामले सामने आने पर तुरंत एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने विभागाध्यक्षों की जिम्मेदारी तय करते हुए किसी भी तरह की लापरवाही सामने आने और सूचना नहीं देने पर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी को निलंबित करने की चेतावनी दी है। 
 जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारियों को अपने क्षेत्रों में खंड विकास अधिकारी, उप खंड शिक्षाधिकारी, वन क्षेत्राधिकारी, वन दरोगा और वन रक्षक के साथ बैठक करके माओवादी गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी भवनों में माओवादी पोस्टर चिपकाने का मामला सामने आने पर वहां के विभागाध्यक्षों की जिम्मेदारी तय करते हुए घटना की सूचना तुरंत देने और मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में किसी भी तरह की लापरवाही होने पर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी को निलंबित करने की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने राजस्व उपनिरीक्षकों को उनके क्षेत्र में घटना घटित होने पर संदिग्ध लोगों का पता लगाने के निर्देश दिए। एसएसपी पी रेणुका देवी ने बताया कि पुलिस द्वारा इस तरह की घटनाओं पर पैनी नजर रखी जा रही है। इन गतिविधियों में जुड़े लोगों पर इनाम भी घोषित किया गया है। उन्होंने राजस्व पुलिस और पुलिस विभाग से समन्वय स्थापित कर कार्य करने को कहा। बैठक में सीडीओ जेएस नागन्याल, एडीएम कैलाश सिंह टोलिया, वनाधिकारी आरएस प्रजापति, आरसी शर्मा, एसडीएम विवेक राय, परियोजना निदेशक डीडी पंत, प्रधानाचार्य पीएस नयाल, अभिसूचना इकाई के प्रभारी संतोष बगडवाल, भीम सिंह मेर, मनोज मासीवाल आदि मौजूद रहे। 
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अब तक एक दर्जन स्थानों पर लग चुके पोस्टर  
अल्मोड़ा। विधानसभा चुनाव के बाद से करीब चार माह के भीतर जिले में अब तक करीब एक दर्जन स्थानों पर माओवाद के पोस्टर लग चुके हैं लेकिन पुलिस प्रशासन के पास पोस्टर लगाने वालों के बारे में कोई ठोस सूचनाएं नहीं है। इसे पुलिस प्रशासन के सूचना तंत्र की विफलता माना जा रहा है। अब तक सोमेश्वर, मनान, बिंता, बगवालीपोखर, भगतोला, दाड़िमखोला, पेटशाल, धौलछीना, चौखुटिया, द्वाराहाट आदि स्थानों पर पोस्टर लग चुके हैं। अलग-अलग स्थानों पर पोस्टर लगने के बावजूद राइटिंग मिलती है। दीवार लेखन का स्टाइल भी एक जैसा ही है। लोगों का मानना है कि अगर माओवादी गतिविधियों में शामिल लोग जल्द पकड़ में नहीं आए तो भविष्य में इनकी सक्रियता और भी बढ़ सकती है। 
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