फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चारों तरफ फैले मलबे में अब तक दबा लोगों का कीमती सामान

Fri, 26 May 2017 10:25 PM IST
अल्मोड़ा़,अमर उजाला
विज्ञापन
आपदा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विज्ञापन

 ग्राम पंचायत बिजरानी में बादल फटने के बाद उफनाए नाले से मची तबाही का मंजर गांव के लोग कभी नहीं भुला पाएंगे। खेत खलिहान, मकान और गोशालाएं बर्बाद होने के बावजूद कोई जन हानि नहीं होना, लोग इसे करिश्मा मान रहे हैं। शुक्रवार को प्रभावित क्षेत्र में तबाही का मंजर देखने वालों की खासी भीड़ रही। चारों तरफ फैले मलबे के नीचे लोगों का कीमती सामान भी दबा हुआ है।
 बिजरानी में मोहन सिंह का मकान, गोशाला, मवेशी सब दफन हो गए तो लीलाधर जोशी के ढाबे के साथ ही शौचालय, बर्तन, फ्रिज और स्कूटी भी मलबे के ढेर में दबी हुई है। जमन सिंह की गोशाला बह गई है। गांव के ही कलम सिंह, हीरासिंह व आलम सिंह के मकान भी खतरे की जद में हैं। कुछ मकानों में दरारें पड़ी हैं। इन तीनों परिवारों ने गांव में अन्यत्र शरण ले रखी है। बिजरानी के अलावा टटलगांव में भी तमाम लोगों के खेत रोखड़ में तब्दील हो गए हैं। इसके चलते काश्तकारों के सामने गंभीर चुनौती पैदा हो गई है। रिवाड़ी में जीवन सिंह अधिकारी का ढाबा भी रिवाड़ी नाले की जद में है। इस ढाबे में भी मलबा भर गया है। रिवाड़ी में लीलाधर, मोहन फल्कोटी व महेंद्र सिंह आदि के मकानों में भी मलबा भर गया है। गजेंद्र सिंह के मकान के सामने की दीवार भी क्षतिग्रस्त हुई है। उपजिलाधिकारी गौरव चटवाल और तहसीलदार ओमवीर सिंह मौके पर जमे हैं। तहसीलदार ने बताया कि प्रभावित परिवारों को राशन उपलब्ध करा दिया गया है। राज्य सभा सांसद प्रदीप टम्टा ने भी प्रभावित क्षेत्र का मौका मुआयना कर प्रभावित परिवारों को सांत्वना दी है।      
विज्ञापन

तहसील प्रशासन की ओर से राजस्व निरीक्षक खीमानंद त्रिपाठी के नेतृत्व में राजस्व कर्मियों ने शुक्रवार को घर-घर जाकर नुकसान का आकलन किया। लोगों का कहना था कि जंगलों में आए दिन लगने वाली आग भी तबाही का एक बड़ा कारण है। पेड़ पौधों की कमी के चलते जंगलों का पानी सीधे बस्तियों में घुसकर तबाही मचाता है। गांव के लोगों का कहना है कि उन्होंने तबाही का ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा। घटना के बाद भी रुक रुक कर हो रही बारिश से लोगों में दहशत है।      
  

पलभर में तबाह हो गए जीवनभर के सपने      
राज मिस्त्री का काम करने वाले मोहन सिंह घटना के दिन शाम पांच बजे जब काम से लौटे तो नजारा देखकर स्तब्ध रह गए। उन्होंने अपने पिता के साथ मिलकर जिस आशियाने को बनाया वह पलक झपकते ही नेस्तनाबूद हो चुका था। दो मंजिला मकान के साथ गोशाला में बंधे उनके पांच मवेशी, जेवरात, नकदी के साथ ही उनका जीवनभर का सपना दफन हो गया। परिवार के लोगों ने किसी तरह भागकर जान बचाई। घटना के बाद मोहन सिंह की पत्नी शांति देवी, बेटा किशन व मनोहर सदमे में हैं। बहू दीपा रो-रोकर बार-बार बेहोश हो रही है। परिवार में पोता हिमांशु और रितिक भी है। मोहन सिंह का परिवार अपने भाई दरबान सिंह के घर में शरण लिए हुए है। परिजनों को इस बात को लेकर आक्रोश है कि उन्हें त्वरित सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई।       

मुआवजे की मांग को लेकर नारेबाजी      
गांव के लोगों ने मोहन सिंह के लिए किसी सुरक्षित स्थान पर मकान बनाने व मुआवजा देने के साथ ही ढाबा मालिक लीलाधर सहित अन्य प्रभावित परिवारों को तुरंत उचित मुआवजा देने की मांग की है। इसको लेकर लोगों ने नारेबाजी भी की, जिसमें भारी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। लोगों का कहना था कि प्रभावित परिवारों के आवास आदि की शीघ्र व्यवस्था होनी चाहिए। नारेबाजी करने वालों में ग्राम प्रधान रेवती देवी, कमला, देवकी, बसंती, पार्वती, दानसिंह नेगी, भोलादत्त, बाग सिंह, दीपक, बबलू, लालसिंह, मालती, नंदी, कस्तूरी, राधा, प्रभा, हंसी, कुंती, दुर्गा, मोहनी सहित तमाम लोग शामिल थे। इधर कानूनगो खीमानंद त्रिपाठी ने बताया कि प्रभावित परिवार को राशन आदि उपलब्ध कराया जा रहा है।      
विज्ञापन


मदद को बढ़े हाथ      
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। आपदा में सबसे अधिक प्रभावित हुए मोहन सिंह के परिवार को आर्थिक सहायता देने के साथ ही राशन आदि देने के लिए भी लोग आगे आने लगे हैं। शुक्रवार को गांव के दानसिंह, भुवन जोशी व किरन नेगी के आह्वान पर कई लोगों ने नकद धनराशि देकर सहयोग किया। कुछ लोग राशन लेकर भी पहुंचे।      
    
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें