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Almora News: अल्मोड़ा में चार माह में कटखने बंदरों ने 167 लोगों को पहुंचाया अस्पताल

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अल्मोड़ा। जिले में नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में कटखने बंदरों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में लोगों में बंदरों की दहशत बढ़ने लगी है। हालात ये हैं कि इस वर्ष अप्रैल महीने तक जिला अस्पताल में 167 लोग बंदरों के हमले से घायल होकर उपचार को पहुंचे। बंदरों के आगे वन विभाग और नगर पालिका भी बेबस नजर आ रही है।
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बंदरों की बढ़ती संख्या पर लगाम लगाना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। अल्मोड़ा में कटखने बंदरों के लोगों पर हमले की घटनाएं दिनोंदिन बढ़ रही हैं। बंदर राह चलते लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर रहे हैं। ऐसे में लोगों में बंदरों का खौफ बढ़ गया है। आवाजाही के दौरान बंदर लोगों के हाथों में सामान छीनकर भाग रहे हैं। उन्हें भगाने पर बंदर लोगों पर हमला कर दे रहे हैं। जिला अस्पताल में दर्ज मामलों के आधार पर जनवरी से अप्रैल माह तक 167 लोग बंदरों के हमले से घायल होकर अस्पताल पहुंचे हैं जिसमें बच्चों की संख्या 50 से अधिक है। हिंसक हो रहे बंदरों ने स्वास्थ्य विभाग की भी चिंताएं बढ़ा दी है। चिकित्सकों के मुताबिक अगर बंदर इसी तरह हिंसक होते रहे तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है एंटी रैबीज वैक्सीन
- जिला अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक बंदरों के काटने से रैबीज होने का खतरा बढ़ जाता है। बंदर के काटने पर घायल को एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाया जाता है। बताया कि अस्पताल में पर्याप्त मात्र में एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध है। बंदरों के हमले में घायल लोगों को समय पर वैक्सीन लगाई जा रही है।
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700 बंदरों का हुआ बधियाकरण
- वन विभाग के मुताबिक एनटीडी स्थित एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर में जनवरी से अब तक 700 बंदरों को बधियाकरण किया जा चुका है। इसमे 210 नगर निगम की ओर से जबकि 490 बंदर सोमेश्वर, अल्मोड़ा और जागेश्वर रेंज से पकड़ कर लाए गए थे।

चार महिनों में बंदरों के हमले में अस्पताल पहुंचे लोगों की संख्या
महीना मरीजों की संख्या
जनवरी 45
फरवरी 42
मार्च 55
अप्रैल 25

कोट-
- जिले में बंदरों के हमले की घटनाएं बढ़ गई हैं। इस वर्ष अब तक अस्पताल में 167 मामले दर्ज है। सभी घायलों को एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाया गया है। अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध है। बंदर की संख्या पर लगाम लगाने को सभी विभागों को मिलकर प्रयास करने होंगे
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डॉ. एचसी गड़कोटी, पीएमएस, जिला अस्पताल, अल्मोड़ा।
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