मौलेखाल (अल्मोड़ा)। भारतीय आयुर्वेदिक एवं औषधि निर्माण की ऐतिहासिक कंपनी आईएमपीसीएल के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों का आंदोलन शनिवार को 27वें दिन भी जारी रहा। शुक्रवार को न्याय के देवता गोल्ज्यू महाराज के दरबार में कंपनी, कर्मचारियों के भविष्य और आयुर्वेद की राष्ट्रीय धरोहर की रक्षा के लिए कर्मचारियों की ओर से संगठन मंत्री भाग्यश्री घले ने अर्जी लगाई।
कर्मचारियों ने अर्जी के माध्यम से गोल्ज्यू महाराज से प्रार्थना की है कि यदि किसी निर्णय से राष्ट्रहित, जनहित और आयुर्वेद की अमूल्य विरासत को नुकसान पहुंचने की आशंका है तो न्याय का मार्ग प्रशस्त हो। उन्होंने सरकार और नीति-निर्माताओं को निष्पक्ष, दूरदर्शी एवं राष्ट्रहित में निर्णय लेने की सद्बुद्धि देने की भी कामना की।
आंदोलनकारी कर्मचारियों ने उत्तराखंड के सांसदों और विधायकों की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश के जनप्रतिनिधियों ने अब तक इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर खुलकर समर्थन नहीं दिया है जबकि यह मामला रोजगार, सार्वजनिक संपत्ति और आयुर्वेद की विरासत से जुड़ा है।
कर्मचारी संगठन ने विनिवेश प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनी की परिसंपत्तियों का सही मूल्यांकन नहीं किया गया। जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट की अनदेखी की गई और शेयर खरीद समझौते (एसपीए) पर जल्दबाजी में हस्ताक्षर कराए गए। कर्मचारियों ने एसपीए को तत्काल स्थगित कर निष्पक्ष जांच कराने तथा जांच पूरी होने तक यथास्थिति बनाए रखने की मांग दोहराई।