अग्निशमन विभाग ने दो साल पहले एक प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। जिसमें अल्मोड़ा में फायर हाइड्रेंट लाइनों के लिए जगह चिन्हित कर प्रस्ताव को हरी झंडी देने और फायर कर्मियों के पदों को भरे जाने की मांग की गई थी, लेकिन शासन की ओर से इस मसले पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई।
आबादी से सटे इलाकों में आग की घटनाओं को काबू करने में फायर कर्मियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि आग लगने की घटनाएं सर्वाधिक गर्मियों में होती हैं। लेकिन आग बुझाने का काम करने वाले अग्निशमन विभाग को गर्मियों में पानी की कमी, हाइड्रेंट लाइनों की कमी से जूझना पड़ रहा है। विभाग में कर्मचारियों की भी काफी कमी है। विभाग ने नगर समेत तहसील और ब्लॉक मुख्यालयों में हाइड्रेंट लाइन लगाने के लिए 56 स्थान चिन्हित किए थे। जिसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा भी गया था। इसके अलावा जिले में फायर कर्मचारी के खाली 19 पदों को भरने की भी मांग की गई थी। लेकिन शासन से कोई कार्रवाई नहीं हुई। अग्निशमन विभाग के पास एक फायर टेंडर भी कम है। हाइड्रेंट लाइन नहीं होने से अग्निशमन विभाग को आग लगने के दौरान दूरस्थ स्थानों से पानी भरकर लाना पड़ता है।
काफी कम हैं हाईडेंट लाइनें
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा में वर्तमान में 31 और रानीखेत में 16 हाइड्रेंट लाइनें हैं। जो आबादी के लिहाज से काफी कम हैं। वर्तमान में करीब 60 से अधिक हाइड्रेंट लाइनों की और जरूरत है। नगर में धारानौला में तीन, एनटीडी, फायर स्टेशन, गैस गोदाम और चौघानपाटा में एक-एक हाइड्रेंट लाइन है। रानीधारा, पांडेखोला, लोअरमालरोड, नरसिंहबाड़ी, जाखनदेवी जैसे सड़क मार्ग वाले इलाकों में हाइडेंट लाइनें नहीं हैं।
कोट-
दो साल पहले प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था। अभी इस मसले पर क्या विचार हुआ शासन से कोई सूचना प्राप्त नहीं है। कर्मचारियों की भी कमी होने से आग की घटनाओं को रोकने में मुश्किल आ रही है।
वंश बहादुर यादव, मुख्य अग्निशमन अधिकारी।