कोसी नदी में चार लाख घन मीटर क्षमता का बैराज तो बना दिया गया है। पर यहां सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। तीन मार्च से बैराज में पानी भरना शुरू हो गया था लेकिन खतरे की चेतावनी देने के लिए अब तक बैराज में सायरन तक नहीं लगाया गया है और न ही नदी किनारे आबादी क्षेत्रों और संभावित खतरे वाले स्थानों पर चेतावनी देने के लिए सूचनात्मक बोर्ड तक लगे हैं। यदि कभी बैराज के गेटों में तकनीक खराबी आने और अन्य कारणों से पानी का रिसाव हुआ तो यह अल्मोड़ा जिले के कोसी से लेकर पड़ोसी जिले के रामनगर तक तबाही मचा सकता है।
अल्मोड़ा और आसपास के क्षेत्रों के पेयजल समस्या के समाधान के नगर से बारह किमी दूर कोसी नदी में बैराज का निर्माण किया गया है। कुल 33.59 करोड़ लागत से बैराज के अलावा आधा मेगावाट क्षमता की बिजली उत्पादन इकाई, बैराज किनारे घाट, पार्क सड़क आदि का निर्माण किया जाना है। बैराज बन गया है, शेष कार्य किए जाने हैं। टेस्टिंग करने के बाद गत तीन मार्च से बैराज के पांचों गेट बंद कर पानी भरना शुरू कर दिया गया था।
साढ़े आठ मीटर ऊंचाई के बैराज की क्षमता चार घन लीटर पानी की है। बैराज में पानी भरने के बाद पौने दो किमी लंबी झील बन रही है। बैराज में गत दिवस करीब छह मीटर ऊंचाई तक पानी भरा था। शुक्रवार को बैराज के गेट नंबर दो में पत्थर फंस गया। इससे तीव्र गति से पानी का रिसाव होने लगा। हालांकि प्रशासन ने इसके लिए अलर्ट जारी कर दिया था। बैराज में पानी भरे करीब दो माह होने को हैं, लेकिन खतरे की चेतावनी देने के लिए बैराज में अब तक सायरन तक नहीं लगा जा सका है। न ही कोसी नदी किनारे आबादी क्षेत्रों और संभावित खतरे वाले स्थानों पर इस संबंध में सिंचाई विभाग ने सूचनात्मक बोर्ड लगाए हैं। यदि कभी बैराज से पानी का रिसाव हुआ तो कोसी का यह पानी अल्मोड़ा से लेकर रामनगर तक भारी क्षति और नुकसान पहुंचा सकता है।
नदी किनारे हैं दर्जनों आबादी वाले क्षेत्र
अल्मोड़ा। कोसी नदी के किनारे कई आबादी क्षेत्र हैं। अल्मोड़ा से लेकर खैरना तक ही नदी किनारे दर्जनों कस्बे हैं। स्थानीय लोग नदी का पानी उपयोग में लाते हैं वहीं नदी किनारे कई स्थानों पर मवेशियों के चारागाह भी हैं। कोसी नदी में रेता, बजरी, पत्थर के खनन में श्रमिक भी लगे रहते हैं, कई लोग मछलियां भी मारते हैं, लेकिन बैराज बनने के बाद नदी किनारे आबादी क्षेत्रों और संभावित खतरे वाले स्थानों पर सूचनात्मक बोर्ड तक नहीं लगे हैं।
पानी पांच से छह घंटे में पहुंच जाएगा रामनगर
अल्मोड़ा। विशेषज्ञों के अनुसार यदि बैराज से पानी का रिसाव हुआ तो यह पानी छह से सात घंटे में रामनगर तक पहुंच जाएगा। नदी के किनारे कई आबादी क्षेत्र ऐसे हैं जो सड़क से काफी दूर हैं। जहां मोबाइल नेटवर्क भी नहीं रहता है। इस दौरान यह पानी नदी से लगे आबादी क्षेत्रों में काफी क्षति पहुंचा सकता है।
कोट----
बैराज में सायरन लगाने के लिए जिला प्रशासन से अनुमति मांगी गई है। नदी किनारे सूचना बोर्ड लगाने का काम शुरू कर दिया गया है।
नवीन सिंघल, अधिशासी अभियंता, कुमाऊं सिंचाई खंड अल्मोड़ा।
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