बागेश्वर। अपर सत्र न्यायाधीश कुलदीप शर्मा ने दहेज हत्या के मामले में अनिल घिल्डियाल को पत्नी की हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषी अनिल पुलिस लाइन में वाहन चालक था। उसे धारा चार दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1981 के तहत भी एक वर्ष के कठोर कारावास और दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई।
भतरौंजखान क्षेत्र निवासी नीमा की शादी 21 फरवरी 2018 को थाना सल्ट जिला अल्मोड़ा के ग्राम कालीगांव करगेत निवासी अनिल घिल्डियाल से हुई थी। शादी के बाद नीमा अपने पति अनिल के साथ सेंज में किराए पर रहती थी। 26 मार्च 2019 को नीमा का शव विकास भवन रोड की ओर जाने वाले अग्रिकुंड पुल के नीचे सरयू नदी किनारे मिला था। पुलिस और स्थानीय लोगों ने मृतका की शिनाख्त नीमा के रूप में की।
सूचना पर पहुंचे मायके वालों ने दहेज हत्या का आरोप लगाया था। नीमा के भाई दामोदर ध्यानी ने कोतवाली में अपने जीजा अनिल घिल्डियाल के खिलाफ नामजद तहरीर दी थी। पुलिस ने अनिल के खिलाफ धारा 304बी, 498ए आईपीसी और 314 डीपी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की थी। सीओ महेश चंद्र जोशी ने विवेचना की। विसरा रिपोर्ट में नीमा की मृत्यु का कारण जहर खाना पाया गया। विवेचना पूरी होने पर सीओ ने न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 12 और आरोपी पक्ष की ओर से एक गवाह पेश किया गया। गवाहों के बयान और पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर न्यायालय ने अनिल को दोषी पाया और धारा 304बी आईपीसी के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। राज्य की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी आबिद हसन, सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी चंदन सिंह पपोला ने पैरवी की।