जिले की सभी विधानसभा क्षेत्रों में इस बार भी सैकड़ों मतदाताओं के नाम सूची से गायब मिले, जिससे उन्हें मतदान केंद्रों से निराश लौटना पड़ा। इनमें से कई युवा मतदाता पहली बार वोट डालने पहुंचे थे जिससे उनमें नाराजगी भी देखी गई। कई लोग कामकाज छोड़कर काफी दूर से मतदान करने पहुंचे थे, लेकिन काफी खोजने के बावजूद लिस्ट में उनका नाम नहीं मिला। इनमें से कई लोगों ने इसके लिए दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
नरसिंहबाड़ी स्थित पोलिंग बूथ में मतदान के लिए पहुंचे कई लोगों का नाम ही नहीं था।
जिस वजह से उनको लौटना पड़ा। बांसगली निवासी रमा वर्मा, हिमांशु टम्टा, किरन टम्टा, कमल नेगी और योगेश नेगी लिस्ट में नाम नहीं होने से वोट नहीं डाल सके। इसके अलावा खत्याड़ी पोलिंग बूथ में गीता देवी पत्नी स्व. गोविंद सिंह वोट डालने पहुंची तो वोटर कार्ड की जानकारी मतदाता सूची से मैच नहीं हो सका। अल्मोड़ा के सेलाखोला बूथ में वोट डालने पहुंचे पत्रकार सुरेश तिवारी और उनकी पत्नी नीरू तिवारी का नाम भी मतदाता सूची में दर्ज नहीं था। उन्होंने बताया कि नाम दर्ज करने की सारी औपचारिकताएं करने के बावजूद उनका नाम सूची से गायब था। इसकी शिकायत वह जिला निर्वाचन अधिकारी से करेंगे।
देवली गांव निवासी राहुल (19) और सूरज (18) के नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं थे। जिससे यह दोनों युवक लोधिया बूथ पर वोट देने से वंचित रह गए। पहली बार वोट डालने पहुंचे इन युवाओं में काफी उत्साह था। विवेकानंदपुरी से करीब एक किमी पैदल चलकर 66 वर्षीय मोहनी जोशी खत्याड़ी बूथ पर मतदान करने पहुंचीं। उनके पास वोटर आईडी कार्ड और आधार कार्ड दोनों थे पर उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं था। इसके अलावा उनकी बहु जया जोशी (40) का नाम भी वोटर लिस्ट से गायब था। उन्हें बिना वोट दिए निराश लौटना पड़ा। मजखाली बूथ में वोट देने पहुंचे मल्ली रियूनी गांव की गीता अधिकारी, दीपा अधिकारी, सावित्री देवी, प्रियंका अधिकारी, आशा अधिकारी, मोनिका आर्या आदि ने बताया कि उन्होंने वोटर लिस्ट में नाम लिखाया था। उनके फोटो भी लिए गए थे, लेकिन आज मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज नहीं था जिससे उन्हें वोट दिए बगैर लौटना पड़ा। इनमें आशा, प्रियंका और मोनिका पहली बार वोटर बने थे और मतदान के लिए उनमें काफी उत्साह था, लेकिन नाम नहीं होने से वह वोट डालने से वंचित रह गए।