अल्मोड़ा। नगर में मां नंदा-सुनंदा के डोले की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। मां के जयकारों से सांस्कृतिक नगरी नंदामय हो गई। मां को विदाई देने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। लोगों ने डोले पर पुष्प वर्षा कर मां से सभी के सुख-समृद्धि की कामना की। शोभायात्रा में शामिल लोग मां नंदा-सुनंदा तू दैण है जाए... आदि भजन गाते हुए चल रहे थे।
एकादशी पर बुधवार को नंदादेवी मंदिर में मां नंदा-सुनंदा की आरती की गई। शंख ध्वनि के साथ ही मां नंदा सुनंदा के जयकारों से मंदिर परिसर गुंजायमान रहा। मंदिर परिसर से शाम 4:10 बजे मां नंदा-सुनंदा के डोले की शोभायात्रा निकली। डोला नंदादेवी बाजार, माल रोड होते हुए जीजीआईसी परिसर के पास मां भगवती मंदिर के सामने माल रोड पर रोका गया।
परंपरा के अनुसार यहां से नंदा-सुनंदा को मंदिर के दर्शन कराए गए। इस भगवती मंदिर को मां नंदा-सुनंदा का मायका भी कहा जाता है। नंदा-सुनंदा को मायके के दर्शन कराकर शोभायात्रा माल रोड से सीढ़ी बाजार, कचहरी बाजार, जौहरी बाजार, गंगोला मोहल्ला, थाना बाजार, पल्टन बाजार, सर्किट हाउस होते हुए दुगालखोला स्थित नौले पर पहुंची। विधि-विधान से मां नंदा-सुनंदा की मूर्तियों का विसर्जन किया गया।
शोभा यात्रा में नंदादेवी मेला समिति के अध्यक्ष मनोज वर्मा, मुख्य संयोजक व सचिव मनोज सनवाल, मुख्य सांस्कृतिक संयोजक तारा जोशी, मेला सह संयोजक रवि गोयल, व्यवस्थापक अनूप साह, हरीश बिष्ट, अर्जुन बिष्ट, अमित साह मोनू, अमरनाथ नेगी, पार्षद कुलदीप मेर, सह संयोजक अभिषेक जोशी आदि शामिल रहे।
विदाई देते भावुक हुई मातृ शक्ति
मां नंदा-सुनंदा के मायके से विदाई के समय डोला यात्रा में शामिल महिलाएं भावुक हो गईं। शोभा यात्रा में गीता मेहरा, लीला बोरा, राधा बिष्ट समेत अन्य महिलाएं शामिल रहीं।
चंद वंशज और राजपुरोहित परिवार ने की आरती
ड्योलीपोखर स्थित जगदंबा दरबार में चंद वंशज और राजपुरोहित परिवार ने पूजा-अर्चना की। यहां चंद वंशज सोमेश्वर चंद्र सिंह, राज पुरोहित परिवार के दिनेश चंद्र पंत, दिवेश पंत, चंद्रेश पंत, कार्तिकेय पंत, आदित्य पंत, विवान पंत ने मां नंदा सुनंदा की आरती कर सुख शांति की कामना की। यहां से राजपुरोहित परिवार के लोग और राज परिवार के लोग नंदादेवी मंदिर परिसर पहुंचे और शोभा यात्रा की तैयारी की।
सौगात के रूप में जलेबी और पेठा ले गए लोग
नंदादेवी मेले के समापन के बाद जलेबी और पेठे की दुकानों में भीड़ रही। लोग मेले की सौगात के रूप में जलेबी, पेठे को खरीद कर घरों को रवाना हुए। डोले की शोभायात्रा को देखने ग्रामीण इलाकों से भी महिलाएं पहुंची थीं। खिलौनों की दुकानों में भी भीड़ रही।
शोभा यात्रा के दिन मौसम ने दिया साथ
बीते तीन चार दिनों से लगातार बारिश हो रही थी लेकिन बुधवार को मां नंदा-सुनंदा के डोले की शोभायात्रा निकलने के दौरान मौसम साफ रहा। इससे मां को विदाई करने आए भक्तों में उत्साह दिखाई दिया। नगर के अलावा चितई, फलसीमा, लोधिया, कोसी, हवालबाग समेत आसपास के क्षेत्रों से काफी संख्या में लोग पहुंचे थे।
घर की छत, बालकनी से किए मां के दर्शन
नंदादेवी मंदिर परिसर लोगों से खचाखच भरा था। पैर रखने की भी जगह नहीं थीं जिसको जहां से जगह मिली वहीं से मां के दर्शन किए। नगर के बाजार में लोगों ने घर की छत, बालकनी से मां के दर्शन किए। लोगों ने शोभा यात्रा पर पुष्प वर्षा की।
रानीखेत में भी पुष्पवर्षा से कर डोला का किया स्वागत
रानीखेत (अल्मोड़ा)। नगर में बुधवार को मां नंदा-सुनंदा के डोले की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। मां को विदाई देने के लिए पूरा नगर उमड़ पड़ा। जगह-जगह महिलाओं ने डोले पर फूलों की वर्षा और अक्षत अर्पित कर मां नंदा-सुनंदा को भावभीनी विदाई दी।
रानीखेत के जरूरी बाजार स्थित प्राचीन नंदा देवी मंदिर से डोला यात्रा का शुभारंभ हुआ। भजन-कीर्तन, नगाड़े और निशानों के साथ शोभायात्रा निकाली गई। डोला यात्रा के दौरान जगह-जगह आरती हुई और श्रद्धालुओं ने मां को नम आंखों से विदाई दी। छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
लोकगीतों और लोकनृत्यों से शोभायात्रा पूरी तरह भक्तिमय और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर हो गई। डोला यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए नंदा देवी मंदिर पहुंची। इसके बाद मृगधारा में मूर्तियों का विसर्जन किया गया। शोभायात्रा में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन महरा, विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल, समिति अध्यक्ष अंशुल साह, संरक्षक हरीश साह, सांस्कृतिक संयोजक विमल सती, हीरा रावत, किरन साह, भुवन साह, मोहिल साह, दीपक पंत, पंकज साह, कैलाश पांडे आदि रहे।
बागेश्वर में सरयू तट पर मूर्ति विसर्जित, नंदा सुनंदा महोत्सव संपन्न
बागेश्वर। नुमाइशखेत मैदान के रामलीला मंच में आयोजित मां नंदा-सुनंदा महोत्सव संपन्न हो गया है। बुधवार को नगर में मां नंदा सुनंदा का डोला भ्रमण कराया गया। मां के जयकारे के साथ सरयू नदी में मूर्ति का विसर्जन किया गया। इस दौरान तट पर खड़े सैकड़ों श्रद्धालुओं ने नम आंंखों से मां नंदा सुनंदा को विदाई दी।
विगत 31 अगस्त को मूर्ति स्थापना के साथ नंदा-सुनंदा महोत्सव का शुभारंभ हुआ था। तीन दिन तक पूजा पंडाल में श्रद्धालुओं ने दर्शन, पूजा की। बुधवार सुबह विधिविधान से पूजा-अर्चना की गई। हवन-यज्ञ के बाद डोला भ्रमण कार्यक्रम शुरू हुआ। नुमाइशखेत गली से होकर मुख्य बाजार तक डोला भ्रमण के बाद श्रद्धालु मूर्तियों को बागनाथ मंदिर के पास सरयू नदी तट पर ले गए।
श्रद्धालुओं ने मूर्तियों को सरयू नदी में विसर्जित कर महोत्सव का समापन किया। इस मौके पर पंडित गोकुलानंद जोशी, यजमान हरीश बिष्ट, अनिल साह, कंचन साह, नवीन साह, पंकज पांडेय, मनोज कपकोटी, अंकुर उपाध्याय, विनोद वर्मा, तारा पांडेय, पूरन पालनी, माया साह, जया जोशी, जीवंती कांडपाल आदि मौजूद रहे।