रानीखेत सिविल एरिया का विहंगम दृश्य।
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रानीखेत की सिविल एरिया को नगरपालिका बनाने की मांग आज तक पूरी नहीं हो सकी है। हर चुनाव में जनप्रतिनिधियों ने इस मुद्दे पर जमकर वोट बटोरे। लेकिन आज तक इसमें कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। इसको चिलियानौला नगरपालिका में शामिल करने का मसला भी अभी तक केंद्र के रक्षा मंत्रालय को नहीं भेजा जा सका है। इस चुनाव में भी मतदाताओं के बीच यह एक अहम मुद्दा रहेगा।
कैंट क्षेत्र में लोगों को भवन निर्माण, दाखिल खारिज, भूमि का वर्गीकरण सहित कई विकास कार्यों में दिक्कतें होती हैं। लोग 1977 से रानीखेत कैंट की सिविल एरिया के 161.81 एकड़ क्षेत्रफल को नगरपालिका बनाने की मांग कर रहे हैं। 2016 में तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने जब चिलियानौला नगर पालिका बनाने की घोषणा की थी तो तब उन्होंने कहा था कि भविष्य में रानीखेत कैंट की सिविल एरिया को चिलियानौला पालिका में शामिल किया जाएगा। लेकिन इस मामले भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। छावनी उपाध्यक्ष और व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष मोहन नेगी कहते हैं कि ए 1 भूमि का हवाला देकर पूर्व में केमू स्टेशन की दुकानों को अन्यत्र बसा दिया गया। कचहरी लाइन के व्यापारियों को आए दिन नोटिस थमा दिए जाते हैं। 1985 में रक्षा मंत्रालय ने कुछ भूमि का डिमार्केशन भी किया।
इनकी कर्मस्थली रहा है रानीखेत
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व नेता प्रतिपक्ष व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री बची सिंह रावत, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, पूर्व विधायक स्व. मदन मोहन उपाध्याय, पूर्व मंत्री स्व. गोविंद सिंह माहरा, पूर्व विधायक पूरन माहरा, वर्तमान विधायक करन माहरा।