बुजुर्ग पिता को कंधे पर अस्पताल पहुंचाता पुत्र।
- फोटो : amar ujala
दूरदराज इलाकों से जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के लिए दिक्कत खड़ी हो गई है। रोगियों को ना तो 108 एंबुलेंस का साथ मिल पा रहा है और ना ही अस्पताल में मरीजों के लिए लिफ्ट उपलब्ध है। लिफ्ट खराब होने के कारण तीमारदार मरीजों को किसी तरह का सहारा देकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। सबसे ज्यादा समस्या गर्भवती महिलाओं को आ रही है।
जिला अस्पताल की लिफ्ट में करीब एक माह से खराबी आ रही है। कई बार लोग लिफ्ट के अंदर ही कैद हो जा रहे हैं। दो-तीन बार जिला अस्पताल के सुरक्षा गार्ड खुद लिफ्ट के अंदर फंस चुके हैं। मंगलवार को बागेश्वर से गर्भवती महिला पूजा तिवारी को लेकर पहुंचे उनके पति गणेश तिवारी और परिजन लिफ्ट के कारण काफी परेशान रहे। वहीं बागेश्वर से पहुंची दूसरी गर्भवती महिला दीपा धामी को भी परिजन किसी तरह सीढ़ियों से चलाकर अस्पताल तक पहुंचे।
कोसी क्षेत्र से पहुंचे 80 वर्षीय डूंगर सिंह को सांस की बीमारी है लेकिन अस्पताल पहुंचने पर जब पता चला कि लिफ्ट खराब है तो उनका पुत्र शिवराज उन्हें अपने कंधे पर बैठाकर डॉक्टर के कक्ष तक ले गया। इन तीनों रोगियों को जिला मुख्यालय तक पहुंचाने लिए 108 एंबुलेंस भी नहीं मिली। मालूम हो जिले में 108 एंबुलेंस सेवा के तीन और खुशियों की सवारी के चार वाहन काफी दिनों से खराब हैं।
वहीं खुशियों की सवारी के आठ वाहनों में से चौखुटिया, सल्ट, भिकियासैंण और अल्मोड़ा के खराब पड़े हैं। 108 एंबुलेंस प्रभारी शैलेंद्र मैठाणी का कहना है कि टायर घिसने के कारण कुछ वाहन खड़े कर दिए गए हैं। इधर जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. प्रकाश वर्मा ने बताया कि लिफ्ट में काफी समय से खराबी आ रही है। हालांकि इसे किसी तरह चालू किया गया लेकिन रविवार से लिफ्ट नहीं चल रही है। तकनीशियन को बुलाकर इसे जल्द ठीक करा लिया जाएगा।