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ओलंपिक में पदक की उम्मीदों को लगे पंख

Sun, 03 Sep 2017 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
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खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर की पत्नी गायत्री के अल्मोड़ा नरसिंहबाड़ी स्थित ननिहाल में मौसी शांति रावत को मिठाई खिलते मामा विजय रावत। - फोटो : अमर उजाला
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एथेंस ओलंपिक में पुरुषों की डबल ट्रैप स्पर्धा में रजत पदक पर निशाना साधने वाले राज्यवर्द्धन राठौर के खेलमंत्री बनने से 2020 में होने वाले ओलंपिक में पदक मिलने की संभावनाओं को पंख लग गए हैं। राज्य के खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का कहना है कि राठौर के खेल मंत्री बनने से पूरे देश में खेलों को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि वह खिलाड़ी रह चुके हैं और देश के खिलाड़ियों की हर तरह की समस्याओं से वाकिफ हैं।
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खत्याड़ी स्थिति उनकी ससुराल में भी जश्न का माहौल है। उनके ससुर डुंगर सिंह मनकोटी और सास गंगा मनकोटी अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनके चचिया ससुर कर्नल डीएस मनकोटी और उत्तरांचल बैडमिंटन संघ के सचिव बीएस मनकोटी यहीं रहते हैं।

लखनऊ में एक कार्यशाला में भागीदारी के लिए गए बीएस मनकोटी ने फोन पर हुई बातचीत में राज्यवर्द्धन राठौर के खेल मंत्री बनने पर खुशी जताई है साथ ही कहा कि अब देश के साथ ही प्रदेश के खिलाड़ियों को भी बेहतर प्लेटफार्म उपलब्ध हो सकेगा। राठौर की पत्नी गायत्री राठौर का यहां नरसिंहबाड़ी में ननिहाल है।
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राठौर के खेल मंत्री बनने से गायत्री के ननिहाल में भी परिजन खुश हैं। ननिहाल में गायत्री की 84 वर्षीय नानी नंदी देवी, मौसी शांति रावत, मामा गोपाल रावत और अल्मोड़ा इंटर कालेज में शिक्षक विजय रावत रहते हैं। खेल मंत्री राठौर अल्मोड़ा आते रहते हैं। जून 2005 में पत्नी गायत्री, बेटी गौरी और बेटा मानव के साथ वह यहां आए थेे।

पिछले साल वह बागेश्वर में आकाशवाणी के रिले केंद्र का उद्घाटन करने के लिए भी आए और दो दिन अल्मोड़ा में ही रुके। खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों ने बताया कि 2020 ओलंपिक के लिए तीन साल का समय बचा है, ऐसे में राठौर ओलंपिक में पदक लाने की लिए जरूर दूरदर्शी योजना बनाएंगे, ताकि भारतीय खिलाड़ी ज्यादा से ज्यादा पदक ला सकें।
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