इस हालत में है मासी-गैरखेत-सराईखेत सड़क।
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। मासी-गैरखेत-सराईखेत मोटर मार्ग गांव-गांव को सड़कों से जोड़ने के दावों की पोल खोल रहा है। स्वीकृत 36 किमी सड़क का निर्माण कार्य 27 साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है। साढ़े तीन किमी सड़क बननी अभी बाकी है। 15 किमी हिस्से में डामरीकरण हुआ है। शेष हिस्से में डामरीकरण को लेकर ग्रामीण शासन-प्रशासन के दरवाजे खटखटा चुके हैं, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है। कच्ची सड़क जगह-जगह से क्षतिग्रस्त है। ग्रामीण मीलों पैदल चलकर रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने को विवश हैं।
मासी, गैरखेत, कलझीपा जोशी, चांच, क्वैराली, कैहड़गांव, तामाढौन, सगुनखेत, चिंडखंडा, बसई, वल्मरा, जनरखाणी, सीमगांव, कमेटपानी सहित लगभग एक दर्जन गांवों को स्याल्दे मुख्य बाजार जोड़ने के लिए 1989 में मासी-गैरखेत-सराईखेत (36 किमी) मोटर मार्ग को स्वीकृति मिली। वन भूमि आड़े आने के कारण एक दशक से भी अधिक समय तक मार्ग में निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। ग्रामीणों ने बताया कि 2004-05 में लोनिवि ने मार्ग का निर्माण कार्य शुरू कराया, लेकिन यह सड़क अभी तक सराईखेत नहीं पहुंच सकी है।
बताया गया है कि साढ़े तीन किमी रोड कटनी अभी बाकी है। ग्रामीणों के तमाम प्रयासों के बाद मासी से गैरखेत लगभग 15 किमी मार्ग में ही डामरीकरण हो सका है। बाकी का हिस्सा आज भी डामरीकरण की बाट जोह रहा है। सड़क कच्ची होने के कारण आए दिन क्षतिग्रस्त रहती है। जगह जगह, कल्वर्ट क्षतिग्रस्त हैं, सुरक्षा दीवारें ढह गई हैं। जिनमें वाहनों का चलना दूभर हो रहा है। लोग मीलों पैदल चलकर जरूरी सामग्री खरीदने के लिए देघाट अथवा स्याल्दे पहुंचते हैं। प्रधान हरीश नैनवाल, संतोष पाल, मालती गिरि, त्रिलोक सिंह, गोपाल राम आदि ने सड़क की दुर्दशा पर नाराजगी जताई है। कहा कि क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी इस संबंध में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। शीघ्र सड़क की हालत नहीं सुधरी तो ग्रामीण आंदोलन करेंगे।