होली गाने आते हैं गढ़वाल के बच्चे
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चौखुटिया (अल्मोड़ा)। कुमाऊं में भले ही बैठकी होली के साथ ही खड़ी होली की धूम मची है। लेकिन गढ़वाल के अधिकांश हिस्सों में छलड़ी के सिवाय होली को लेकर खास उत्साह नजर नही आता है अलबत्ता रंग पड़ने के साथ ही होली गाते बच्चों की टोली हर कदम पर नजर आती है। यह भी कह सकते हैं कि गढ़वाल में होली की रौनक ढपली, चिमटा लिए गाते बच्चों और युवाओं की टोली ने बरकरार रखी है।
कुमाऊं में बैठकी होली के साथ ही खड़ी होली की धूम भी मची है, हालांकि अब गिने चुने गांवों में ही खड़ी होती हो रही है, जबकि महिलाओं की बैठकी होली कमोवेश सभी गांवों में हो रही है। जहां तक गढ़वाल का सवाल है वहां छलड़ी के मौके पर तो खूब होली खेली जाती है, लेकिन उससे पहले इक्का-दुक्का जगहों पर ही होली रस देखने को मिलता है। चौखुटिया विकास खंड के गढ़वाल से लगे गांवों में भी उसका प्रभाव साफ नजर आता है।
विकास खंड के बिजरानी, रिवाड़ी, भनोटिया, टटलगांव आदि गांवों के बच्चों की टोली सुबह ही घर से पैदल चलकर छह किलोमीटर दूर चौखुटिया पहुंच जाती है। ढपली, चिमटा, ढोलक बजाते होली गाते झूमते नन्हे होल्यार घर, दुकानों में जाकर लोगों को होली की बधाई देते हैं। लोग उन्हें मिठाई या नगद राशि देते हैं। बच्चे बताते हैं कि होली में मस्ती के साथ ही प्रोत्साहन राशि भी मिल जाती है।