पूरे क्षेत्र में होली गायन की धूम मची रही। मनेला गांव की होली निशान के साथ गगास स्थित पिंडेश्वर महादेव मंदिर पहुंची। यहां 71 वर्षीय बुजुर्ग त्रिलोक सिंह के नेतृत्व में खड़ी होली का गायन हुआ। शिवा गंगा चले जगतारण को, शिवा के मन भावे हर काशी जैसे कई पारंपरिक होलियों का गायन हुआ। सभी होल्यार सफेद रंग के कपड़ों में थे। मनेला से गगास तक पूरे मोटर मार्ग में वाहन रोककर भी लोग होली सुनते देखे गए। मनेला निवासी नवीन चंद्र ने बताया कि यहां 125 वर्षों से होली गायन हो रहा है। चतुर्दशी के दिन होल्यार निशान लेकर शिव मंदिर जाते हैं, यह निशान एराड़ी, मनेला, गगास के ग्रामीणों का संयुक्त निशान है। मंदिर पहुंचने पर निशान की पूजा की जाती है।
वरिष्ठ होल्यार मथुरा दत्त की अगुवाई में होली को लेकर बच्चों में खासा उत्साह देखा गया। इधर निकटवर्ती मंगचौड़ा के ग्रामीणों होल्यारों ने नगर में होली गायन किया। होल्यार पूरी बाजार में नगाडे़, निशान, रणसिंघा बजाकर होली गाते रहे। स्थानीय व्यापारियों आदि लोगों ने भी उन्हें सहयोग किया। नगर में खड़ी, बाजार, जरूरी बाजार, सदर बाजार, सुभाष चौक, गनियाद्योली, ताड़ीखेत आदि आसपास के क्षेत्रों में महिलाओं की बैठकी सजी। होली में महिलाएं जमकर थिरकीं। उधर निकटवर्ती चौकुनी, कलौना गांव में भी होल्यार होली गायन करने में मस्त रहे।
छरड़ी के लिए पुलिस प्रशासन मुस्तैद
रानीखेत। शुक्रवार को प्रस्तावित होली की छरड़ी की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। बाजार में लोगों ने अबीर, गुलाल, गुजिया, मिठाई की खरीदारी की। दोपहर बाद बाजार में पूरी तरह से सन्नाटा पसर गया। इधर पुलिस, प्रशासन ने छरड़ी में शांति व्यवस्था बनाए रखने के पुख्ता इंतजाम किए हैं। छरड़ी के दिन बाजार में वाहनों का प्रवेश पूरी तरह से बंद रहेगा। व्यापारिक प्रतिष्ठान भी पूरी तरह से बंद रहेंगे।