चौखुटिया (अल्मोड़ा)। नगर पंचायत के निकटवर्ती क्षेत्रों में महिलाओं की बैठकी होली गीतों की गूंज हर ओर सुनाई देने लगी है लेकिन पुरुषों की खड़ी होली गाने वाली टोली बहुत कम दिख रही है। इस सबके बीच चांदीखेत के हाल्यारों ने 25 वर्षों से खड़ी होली गायन की परंपरा को जिंदा रखा है।
पहले गेवाड़ घाटी के करीब हर गांव में पुरुषों की टोली होली के गीत गाती थी। कई गांवों के होल्यार होली गायन के लिए नगर क्षेत्र में भी पहुंचते थे। बाद में शराब और हुड़दंग में झगड़े होने के कारण अधिकतर गांवों में खड़ी होली की परंपरा कम हो गई। इस कारण महिलाओं की बैठकी होली हर गांव, कस्बे और मोहल्ले में होने लगी है। इन सबके बीच चांदीखेत के होल्यार पुरुषों की खड़ी होली की परंपरा को बचा रहे हैं।
मुख्य संयोजक बालम गिरी, गोपाल गिरी, चंदन सिंह, भूपाल सिंह, पूरन सिंह, सुंदर गिरी, मोहन सिंह, भगवत सिंह आदि का कहना है कि पुरुषों की खड़ी होली का खास महत्व है। इससे नई पीढ़ी को भी बहुत कुछ सीखने के लिए मिलता है। होल्यारों के साथ नगाड़े, निसाणों पर संगत करने वाले मोहन राम, हर राम, लछराम आदि का कहना है होली का आनंद परंपरागत वाद्य यंत्रों के बिना अधूरा है।
बैरती की होली का अलग अंदाज
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। चीर बंधन और रंग पड़ने के साथ ही तहसील क्षेत्र के अनेक गांवों में महिलाओं की बैठकी होली के साथ ही पुरुषों की खड़ी होली भी शुरू हो गई है। चांदीखेत में पुरुष होल्यारों ने सिद्धि को दाता, गिरिजानंदन गणपति देवा खेल रहे होली..., बृजमंडल देश देखो रसिया..., मथुरा में खेलें कृष्ण हरी..., भजो दशरथ नंदन जनक लली... सहित कई होली गीतों का गायन किया। पान-बैरती में होलिका ध्वजारोहण किया गया। बैरती कालिका थान देवी मंदिर में परंपरा के अनुसार पान, बैरती, सेलागढ़ी, गैराड़, ककनर, उलैनी के होल्यार एकत्र हुए। विशेष पूजन कार्यक्रम के बाद स्तुति गान के साथ मंदिर परिक्रमा कर होली गायन हुआ। बैरती, पान, चित्रेश्वर में होली गायन का अपना अंदाज है। दीपाकोट गांव में चीर बंधन के साथ होली गायन शुरू हो गया है।