अगनेरी मंदिर परिसर में चैत्राष्टमी मेले के दूसरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। मां अगनेरी सांस्कृतिक लोक कला मंच के कलाकारों की प्रस्तुति ने लोगों को झूमने का मजबूर कर दिया। ढौल दमाऊ के साथ प्रस्तुत किया गया लोक गीत किनारा का झाला घुघुती व वंदना हेमंत देश हौला तिरजूगी नारायण की प्रस्तुति ने मंत्र मुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में महिलाओं के अभिनय ने समां बांध दिया।
मेले में पहली बार भाग ले रहे राजकीय प्राथमिक स्कूल बिष्ट बाखली के बच्चों ने गढ़वाली लोकगीत नीलमा-नीलमा न पाकीजाला केलमा की प्रस्तुति से खूब वाहवाही लूटी। इसी क्रम में विजडम पब्लिक स्कूल के बच्चों की प्रस्तुति ज्यौति कलश छलके भी सराहनीय रही। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मुख्य आकर्षण महिलाओं का जोरदार अभिनय रहा। धनस्यारी से पहुंची गंगा देवी व बचूली देवी के अलावा गीता भट्ट आदि ने लोकगीतों के माध्यम से हर किसी का ध्यान खींचा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने को लेकर महिलाओं की होड़ ने मेला समिति की भी हौसलाअफजाई की।
कार्यक्रम का संचालन जीवन नेगी, लीला जोशी व दरबान सिंह बिष्ट ने किया। वहीं मेला समिति के अध्यक्ष दयाल मेहरा, संयोजक डा. कुलदीप बिष्ट, पूर्व प्रमुख मीना कांडपाल, राजेश चौधरी, गंगासिंह रावत, भावना शर्मा, भोलादत्त आदि थे।
आज गढ़वाल की महिलाएं करेंगी पांडव लीला
चैत्राष्टमी मेले के तीसरे दिन रविवार को दोपहर दो बजे से गढ़वाल के रूद्रप्रयाग की महिलाओं द्वारा की जाने वाली पांडव लीला और द्रोपती का चीर हरण आकर्षण मुख्य केंद्र होगा। इसको लेकर महिलाओं के साथ ही मेला समिति द्वारा भी बड़ी तैयारी की गई है। गढ़वाल की महिलाएं परंपरागत परिधानों में पहुंचेगी।