पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा ने केंद्र सरकार पर हिमालयी राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र की नई बजट नीति से उत्तराखंड को दो सालों में अब तक 5380 करोड़ का नुकसान हो गया है। श्री टम्टा अल्मोड़ा में पत्रकार वार्ता में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए पूर्व में राज्य को अधिकांश योजनाओं में 90 और दस फीसदी के अनुपात में बजट मिलता था। योजना आयोग के समाप्त होने के बाद फंडिंग पैटर्न 50:50 का हो गया है। इससे नवोदित और आर्थिक तौर से कमजोर राज्यों में विकास प्रभावित हो गया है।
उन्होंने कहा कि देश को प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध कराने में हिमालयी राज्यों का विशेष योगदान है। यूपीए सरकार के दौरान गठित बीके चतुर्वेदी आयोग ने इन राज्यों को पर्यावरणीय दृष्टिकोण से अलग से बजट देने का सुझाव दिया था। सिफारिश के मुताबिक फंडिंग होती तो राज्य को प्रति वर्ष 10 हजार करोड़ से अधिक की धनराशि मिलती, लेकिन केंद्र सरकार चतुर्वेदी आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं कर रही है।
उन्होंने कहा कि हिमालय की सीमाओं पर असंतोष का कुप्रभाव देश पर पड़ेगा। केंद्र सरकार को इन राज्यों के विकास को प्रभावी पहल करनी चाहिए। श्री टम्टा ने मोदी सरकार पर कारपोरेट घरानों की हित पोषक होने का आरोप लगाया। इस मौके पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष पीतांबर पांडे, प्रमुख हरीश बनौला, तारा जोशी, पूरन रौतेला, विपिन भट्ट, रॉबिन भंडारी आदि मौजूद थे।