जीर्ण-शीर्ण हालत में राम सिंह धौनी आश्रम।
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आजादी के तमाम इतिहास को संजोए और सालम में 1942 में हुई रक्त रंजित क्रांति का साक्षी रहा राम सिंह धौनी आश्रम जीर्ण-शीर्ण हालत में है। आश्रम की छत क्षतिग्रस्त हो रही है और दीवारों से पत्थर गिर रहे हैं। लोग काफी समय से इस आश्रम के जीर्णोद्धार की मांग उठा रहे हैं, लेकिन क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत अथवा प्रशासन के किसी विभाग ने इसके जीर्णोद्धार के लिए कोई योजना नहीं बनाई है। यदि इसका जीर्णोद्धार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में यह आश्रम इतिहास बनकर रह जाएगा।
देश की आजादी में सालम का भी अहम योगदान रहा है। सालम के कई क्रांतिकारियों ने आजादी की लड़ाई में अंग्रेजी सेना से लोहा लिया और कई क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान दिया। सालम के महान क्रांतिकारी राम सिंह धौनी की मृत्यु के बाद पंडित दुर्गा दत्त शास्त्री, षष्टी दत्त पांडे, इंद्रदेव कांडपाल, डिकर सिंह धानक आदि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने 1935 में सालम के जैंती में राम सिंह धौनी आश्रम की स्थापना की। स्थापना के बाद से ही यह आश्रम स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख केंद्र भी रहा। स्थिति यह है कि क्रांतिकारियों की स्मृति में बना आश्रम आज बदहाल हो गया है। आश्रम की छत टूटने लगी है और दीवारों से पत्थर गिर रहे हैं। आसपास झाड़ियां और घास उग गई है। इससे पूरा आश्रम झाड़ियों में छुप गया है।
उत्तराखंड राज्य बनने के 16 साल बाद प्रदेश में तमाम सरकारें आईं और गईं, लेकिन किसी ने भी इस आश्रम की सुध नहीं ली। स्थानीय स्तर पर ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत अथवा जिला पंचायत की ओर से भी इस आश्रम के जीर्णोद्धार की कोई योजना तैयार नहीं की गई है। इस स्थिति में स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को बयां करने वाली इस धरोहर का नाम-ओ-निशान मिट जाएगा। इधर क्षेत्र पंचायत सदस्य धना धौनी का कहना है कि आश्रम के जीर्णोद्धार के लिए शीघ्र ही प्रशासन के अधिकारियों से वार्ता की जाएगी।