सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कपकोट का भवन।
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विकास खंड का एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कपकोट में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के कई पद खाली हैं। अस्पताल में डॉक्टरों के स्वीकृत 12 पदों में आठ रिक्त चल रहे हैं। इससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नागरिकों ने कहा कि वह नगर पंचायत चुनाव में अपना भाग्य आजमा रहे चेयरमैन और सभासद के प्रत्याशियों से अस्पताल की समस्याओं को लेकर उनके स्तर से अब तक किए गए प्रयासों के बारे सवाल करेंगे।
2011 की जनगणना के अनुसार विकास खंड की जनसंख्या 70 हजार से अधिक है। अस्पताल पांच साल तक पीपीपी मोड के अधीन रहा। लोगों के विरोध के चलते शासन द्वारा गत 13 मई को सीएचसी को पीपीपी मोड से हटाकर स्वास्थ्य विभाग के नियंत्रण में आ गया। लोगों को आशा थी कि अस्पताल की समस्याओं का समाधान होगा लेकिन समस्याएं जस की तस हैं।
अस्पताल में डॉक्टरों के 12 स्वीकृत पदों में से केवल चार पर ही डॉक्टर तैनात हैं। बाल रोग, हड्डी, ईएनटी, सर्जन, एनएसथीसिया के पद खाली हैं। तकनीशियन नहीं होने से एक्सरे मशीन धूल फांक रही है। अल्ट्रासाउंड मशीन चलाने के लिए सप्ताह में एक दिन जिला अस्पताल से रेडियोलॉजिस्ट आते हैं। जीएनएम के तीन पदों में से एक पद, एएनएम का एक पद जबकि वार्ड ब्वॉय का एक पद लंबे समय से खाली है। अस्पताल में चौकीदार भी नहीं है। अस्पताल का वाहन भी अब काफी पुराना हो चुका है। व्यापार मंडल के अध्यक्ष तारा कपकोटी, सचिव हेम कपकोटी, कोषाध्यक्ष नवीन उपाध्याय और जिला उपाध्यक्ष रघुवीर बिष्ट, ग्राम प्रधान पूरन कपकोटी आदि ने शासन से अस्पताल की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग की है।
- अस्पताल की समस्याओं को लेकर उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। अल्ट्रासाउंड के लिए जिला अस्पताल से हर सप्ताह बृहस्पतिवार के दिन रेडियोलॉजिस्ट आते हैं।
- बिजेंद्र रावत, प्रभारी चिकित्साधिकारी, सीएचसी कपकोट।