जागेश्वर में बंद पड़ा हर्बल गार्डन।
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पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए करीब आठ साल पहले जागेश्वर में 58 लाख रुपये की लागत से विकसित किया गया हर्बल गार्डन बर्बाद हो चुका है। बजट के अभाव में हर्बल गार्डन में रखे गए मजदूर तीन साल पहले हटा दिए गए। जिससे गार्डन में लगाए गए तुलसी, जंबू, थुनेर, सतावर, आंवला, तेजपात, ब्राह्मी आदि के पौधे भी सूख चुके हैं और इनकी जगह वहां घास उग आई है। इतना बजट खर्च करने के बाद अब हर्बल गार्डन को बंद कर दिया गया है।
आज से करीब सात आठ साल पहले सिविल सोयम प्रभाग ने कैंपा योजना के तहत जागेश्वर में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए हर्बल गार्डन बनाया था। पांच हेक्टेयर में फैले इस गार्डन में तुलसी, जंबू, थुनेर, सतावर, आंवला, तेजपात, ब्राह्मी जैसी जड़ी-बूटी के पौधे उगाए गए थे। साथ ही वहां पौधों की नर्सरी विकसित की गई थी। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए चिल्ड्रन पार्क के साथ ही एक कैंटीन भी बनाई गई थी। गार्डन की देखरेख के लिए चार कर्मचारी (वाचर) रखे गए थे। कुछ साल तक हर्बल गार्डन पर्यटकों के घूमने का अच्छा स्थान था लेकिन 2016 से दिक्कत आनी शुरू हो गई। वाचरों के लिए बजट नहीं मिलने से उन्हें काम से हटा दिया गया। धीरे-धीरे गार्डन में लगाए गए जड़ी-बूटी के पौधे भी सूखने लगे। अब हालत यह है कि यह गार्डन लगभग पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। अब वहां चीड़ के पेड़ और जंगली घास आदि उग आई है। गार्डन को अब पर्यटकों के लिए भी बंद कर दिया गया है।
कोट-
जून 2016 से यहां कोई भी श्रमिक कार्यरत नहीं है। धनाभाव के कारण गार्डन की देखरेख नहीं हो पा रही है। विभाग से बजट की मांग की गई है। बजट आने पर ही गार्डन को पुनर्जीवित किया जाएगा।
जीपी सिंह, डीएफओ अल्मोड़ा।